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‘कातिलों को सजा’: खून के धब्बे, 24 फोटो और चार वीडियो, बेजुबान सबूतों ने दिलाई उम्रकैद, औरैया दोहरा हत्याकांड

Fri, 21 Aug 2026 08:39 AM IST
Himanshu Awasthi मोहित गुप्ता, अमर उजाला, औरैया
मोहित गुप्ता, अमर उजाला, औरैया Published by: Himanshu Awasthi Updated Fri, 21 Aug 2026 08:39 AM IST
सार
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Auraiya Double Murder Case: दोहरे हत्याकांड में अदालत द्वारा दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के पीछे वैज्ञानिक साक्ष्यों और डिजिटल सबूतों की अहम भूमिका रही। फॉरेंसिक जांच में घटनास्थल की खून से सनी मिट्टी और कपड़ों पर मिले खून के धब्बों की पुष्टि मृतकों से हुई। इसके अलावा, मौके पर बनाए गए चार वीडियो और 24 तस्वीरों ने यह साबित कर दिया कि हमलावर हथियार लेकर आए थे और पीड़ित पक्ष निर्दोष था।

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Auraiya Double Murder Blood stained soil 24 photos and four videos led to the killers being brought to justice
Auraiya Double Murder Case - फोटो : amar ujala

विस्तार

औरैया चर्चित दोहरे हत्याकांड में कोर्ट में पूर्व एमएलसी और साथी कातिलों को अंजाम तक पहुंचाने में खून से सनी मिट्टी, 24 फोटो और चार वीडियो ने अहम भूमिका निभाई। चश्मदीदों में वकील मंजुल के भाई संजय और मृतका सुधा का भाई आशीष के बयान के साथ इन मजबूत साक्ष्यों के आगे रसूखदार कातिलों के पैंतरे और गवाही टिक नहीं पाई। वहीं, बचाव पक्ष भीड़ ने हत्या की यह साबित करने में जुटा रहा।

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शहर के मोहल्ला नारायणपुर स्थित पंचमुखी मंदिर परिसर की एक बीघा जमीन पर सपा के पूर्व विधान परिषद सदस्य कमलेश पाठक, पूर्व ब्लॉक संतोष पाठक सहित 10 लोगों ने जबरन कब्जाने का किया था। मंदिर से कुछ दूरी पर रहने वाले अधिवक्ता मंजुल चौबे ने इसका विरोध किया। 15 मार्च 2020 को मंजुल के पिता शिवकुमार, उनकी चचेरी बहन सुधा, भाई आशीष सहित परिवार के लोग मंदिर में पूजा कर रहे थे। इसी दौरान दबंगों ने सुधा और मंजुल की गोली मारकर हत्या कर दी थी।

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अलग-अलग पैकेट में सुरक्षित किया गया था
दोहरे हत्याकांड में फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से चचेरे भाई बहनों के खून से सनी मिट्टी, उनके खून लगे कपड़े और दोनों के चप्पल बतौर साक्ष्य जुटाए थे। सभी को अलग-अलग पैकेट में सुरक्षित किया गया था। तत्कालीन विवेचक आलोक कुमार दुबे ने इन सभी को जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा था। जहां जांच के बाद रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हुई कि घटनास्थल पर खून से सनी मिट्टी, उनके कपड़ों में लगा खून और चप्पलों पर मिले खून के छींटे मृतक चचेरे भाई-बहन के ही थे।

पथराव के साथ गोली और बम चलाए थे
इसे कोर्ट ने अहम साक्ष्य माना। इतना ही नहीं घटना के दौरान आसपास के लोगों ने कुछ वीडियो और फोटो बनाए थे। जिसे पुलिस ने साक्ष्य के तौर पर न्यायालय में पेश किया था। इनमें चार वीडियो और 24 फोटो ऐसे थे जिन्होंने सजा का आधार तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मामले में बचाव पक्ष यह साबित करने में जुटा रहा कि भीड़ ने पथराव के साथ गोली और बम चलाए थे, जिसमें चचेरे भाई-बहनों की मौत हुई।

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10 सेकंड के अंदर चलीं थीं दो गोलियां
घटना के चार वीडियो जो आसपास के लोगों ने बनाए थे उसमें एक वीडियो में कुछ युवक पथराव करते नजर आ रहे हैं। इसी दौरान एक गोली चलती है तो भीड़ इधर-उधर भागती नजर आई। ठीक 10 सेकंड के बाद दूसरी गोली चली। वीडियो से पुष्ट हुआ कि पूर्व एमएलसी पक्ष के लोग ही हथियार लेकर मंदिर पहुंचे थे। वहां पूजा कर रहे मंजुल और उसके परिवार के पास कोई हथियार नहीं था। वहीं दूसरे वीडियो में भी ताबड़तोड़ फायरिंग, गाली-गलौज और बचने के लिए लोग भागते हुए कैद हुए हैं।

24 फोटो ने भी दी मौन गवाही

दोहरे हत्याकांड के दौरान और बाद में जो फोटो पुलिस और स्थानीय लोगों ने खींचे उन सबने भी कातिलों के ताबूत में आखिरी कील ठोकने का काम किया। साक्ष्य के तौर पर कोर्ट में दाखिल किए गए फोटो में घटनास्थल पर खड़ी विधान परिषद सदस्य लिखी कार की आगे-पीछे का फोटो, संतोष की बुलेट बाइक, एक बाइक की नंबर प्लेट से छेड़छाड़, एक स्कॉर्पियो, एक वैगनआर कार, दो अन्य बाइक, जमीन पर पड़े खून, हाथ में डंडे लिए लोग, चचेरे भाई-बहनों के आठ फीट की दूरी पर खून से लथपथ पड़े शव, मौजूद पुलिस, गोली का खोखा दिखाता चश्मदीद आशीष आदि शामिल हैं।

तीन गवाह बयानों से पलटे
दोहरे हत्याकांड में पुलिस ने कुल 32 लोगों को गवाह बनाया था। इन गवाहों में पूर्व एमएलसी का प्राइवेट गनर नवीन तिवारी भी शामिल था। इसके अलावा गांव का ही अजीत कुशवाहा और उसके पिता रामरतन कुशवाहा को भी गवाह बनाया था। पुलिस को दिए गए बयान के बाद पूर्व एमएलसी की दहशत के चलते तीनों गवाह कोर्ट में अपनी बात से मुकर गए थे। वहीं करीब पांच गवाह ऐसे भी थे जो पूर्व एमएलसी के खेमे के थे। वादी पक्ष ने उनकी गवाही कराने से इनकार करते हुए उनकी गवाही डिस्चार्ज करा दी थी।

दोषियों को सजा मिलने के बाद वादी व भाई ने मंदिर में टेका मत्था
एमपी-एमएलए कोर्ट ने कमलेश पाठक समेत 10 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। सजा होने के बाद वादी आशीष चौबे व उनके चचेरे भाई संजय चौबे उसी पंचमुखी मंदिर पहुंचे, जहां इस वारदात को अंजाम दिया गया था। वहां दोनों ने बजरंगबली के सामने मत्था टेका और प्रसाद चढ़ाया। बृहस्पतिवार को मृतक की मां परिवार के साथ मंदिर पहुंची और भगवान के सामने हाथ जोड़कर धन्यवाद ज्ञापित किया।

पीड़ित परिवार का एडीजी ने जाना हाल
सदर कोतवाली पहुंची एडीजी अनुपम कुलशेष्ठ ने बृहस्पतिवार को दोहरे हत्याकांड के पीड़ित परिवार से मुलाकात की। उन्होंने विस्तार से घटना के बारे में पूछा और परिवार के हालचाल भी लिए। साथ ही उन्होंने पुलिस से परिवार की सुरक्षा व्यवस्था बेहतर रखने के निर्देश दिए हैं। इस दौरान उन्होंने घटना के समय के वीडियो भी देखें। इसके अलावा एडीजी डीजीसी अभिषेक मिश्रा, एडीजीसी चंद्र भूषण तिवारी पैरोकार अनूप कुमार, कोर्ट मोहर्रिर विनय सिंह को प्रभावी पैरवी व समन्वय स्थापित करते हुए अपराधियों को न्यायालय से कठोर दंड दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में प्रशस्ति पत्र दिया।

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