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Kanpur News: तिलौंची गांव की जमीन में मिला 12 फीट गहरा गड्ढा, ग्रामीण बोले मुगलकालीन सुरंग
Fri, 21 Aug 2026 12:42 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Fri, 21 Aug 2026 12:42 AM IST
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सरवनखेड़ा (कानपुर देहात)। गजनेर थाना क्षेत्र के तिलौंची में बारिश के चलते आबादी क्षेत्र में करीब चार फीट चौड़ा व 12 फीट गहरा गड्ढा हो गया। ग्रामीणों ने अंदर दो दिशाओं में गड्ढे के बंट जाने पर मुगल कालीन सुरंग होने की बात कही है। सूचना पर पहुंची पुलिस ने गड्ढे को ड्रम पर बल्ली रखवाकर बंद करवाया है।
तिलौंची निवासी कृष्ण कुमार सिंह की पत्नी सुनैना ने बताया कि 18 अगस्त की सुबह घर की सफाई करने के दौरान दरवाजे के बाहर खाली पड़ी जगह पर उन्हें एक गड्ढा दिखा था। इस पर उन्होंने किसी कुत्ते के द्वारा गड्ढा खोद देना समझ कर अनदेखा कर दिया। बुधवार सुबह गड्ढा काफी गहरा और बड़ा हो जाने पर उन्होंने डायल 112 पर पुलिस को जानकारी दी थी। मौके पर पहुंची पुलिस ने ग्रामीणों की मदद से बजरी डलवाकर गड्ढे को भरने का प्रयास किया लेकिन गड्ढा और गहरा हो गया।
बृहस्पतिवार सुबह गड्ढा करीब 12 फीट गहरा हो जाने पर गांव की प्रशासक अर्चना गौतम के पति राहुल ने रस्सी में टॉर्च व मोबाइल बांधकर वीडियो बनाई तो वीडियो में पूर्व व पश्चिम दो दिशाओं में सुरंग दिखाई दी। सुरंग मिलने की जानकारी फैलते ही मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई। गांव के बुजुर्ग बोले कि जिस स्थान पर बस्ती बनी हुई है। यहां प्राचीन गढ़ी थी। गांव के 80 वर्षीय कन्हैयालाल ने बताया कि वह बचपन से इसी स्थान पर खेले कूदे हैं। यहां पूर्व में कोई की कुआ नहीं था और न ही यहां किसी ने बोरिंग करवाई थी। खाली जगह होने के चलते गांव के लोग यहां अपने वाहन को मोड़ने के लिए भी आते थे। सुरंग प्राचीन है।
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सूचना पर राजस्व लेखपाल गिरजेश परिहार व थाना पुलिस ने जांच-पड़ताल की है। थानाध्यक्ष सनत कुमार ने बताया कि सुरक्षा के लिहाज से गड्ढे के ऊपर ड्रम व बल्लियां रख दी गई हैं। साथ ही लोगों से गड्ढे के पास न जाने की अपील की गई है। लेखपाल गिरजेश ने बताया कि गड्ढे में सुरंग है या नहीं यह तो पुरातत्व विभाग के विशेषज्ञों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। मामले की जानकारी तहसील प्रशासन को दी गई है।
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400 साल पहले मेवाती लोगों को ठिकाना होती थी गढ़ी
नेहरू इंटर काॅलेज के प्रबंधक जय सिंह चौहान ने बताया कि करीब 400 साल पहले रनियां, सरवनखेड़ा, मनेथू, तिलौंची, सैथा, कौसम, बारा गांव में मेवाती जाति के लोग ऊंचे स्थानों पर मजबूत इमारत बनाकर रहते थे। जिन्हें गढ़ी कहा जाता था। मेवातियों के समय से कर न देने पर मुगलिया सल्तनत ने मेवातियों को भगाने के लिए चौहान क्षत्रिय जाति के लोगों से समझौता किया था। इसके बाद वह लोग यहां से भागकर दूसरे स्थानों पर बसे थे। जोकि आज भी 84 गांव के नाम से मशहूर है। उन्होंने कहा कि आशंका है कि यह सुरंग मेवातियों ने बनाई हो।
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बयान...
तिलौची गांव में जमीन में कई फीट गहरा गड्ढा मिला है। जिसे ग्रामीण सुरंग बता रहे हैं। इसको लेकर जिला स्तरीय अधिकारियों को पत्राचार किया जा रहा है। मामले की उच्चाधिकारियों के निर्देश पर जांच की जाएगी। - पवन कुमार, तहसीलदार अकबरपुर
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तिलौंची निवासी कृष्ण कुमार सिंह की पत्नी सुनैना ने बताया कि 18 अगस्त की सुबह घर की सफाई करने के दौरान दरवाजे के बाहर खाली पड़ी जगह पर उन्हें एक गड्ढा दिखा था। इस पर उन्होंने किसी कुत्ते के द्वारा गड्ढा खोद देना समझ कर अनदेखा कर दिया। बुधवार सुबह गड्ढा काफी गहरा और बड़ा हो जाने पर उन्होंने डायल 112 पर पुलिस को जानकारी दी थी। मौके पर पहुंची पुलिस ने ग्रामीणों की मदद से बजरी डलवाकर गड्ढे को भरने का प्रयास किया लेकिन गड्ढा और गहरा हो गया।
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बृहस्पतिवार सुबह गड्ढा करीब 12 फीट गहरा हो जाने पर गांव की प्रशासक अर्चना गौतम के पति राहुल ने रस्सी में टॉर्च व मोबाइल बांधकर वीडियो बनाई तो वीडियो में पूर्व व पश्चिम दो दिशाओं में सुरंग दिखाई दी। सुरंग मिलने की जानकारी फैलते ही मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई। गांव के बुजुर्ग बोले कि जिस स्थान पर बस्ती बनी हुई है। यहां प्राचीन गढ़ी थी। गांव के 80 वर्षीय कन्हैयालाल ने बताया कि वह बचपन से इसी स्थान पर खेले कूदे हैं। यहां पूर्व में कोई की कुआ नहीं था और न ही यहां किसी ने बोरिंग करवाई थी। खाली जगह होने के चलते गांव के लोग यहां अपने वाहन को मोड़ने के लिए भी आते थे। सुरंग प्राचीन है।
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सूचना पर राजस्व लेखपाल गिरजेश परिहार व थाना पुलिस ने जांच-पड़ताल की है। थानाध्यक्ष सनत कुमार ने बताया कि सुरक्षा के लिहाज से गड्ढे के ऊपर ड्रम व बल्लियां रख दी गई हैं। साथ ही लोगों से गड्ढे के पास न जाने की अपील की गई है। लेखपाल गिरजेश ने बताया कि गड्ढे में सुरंग है या नहीं यह तो पुरातत्व विभाग के विशेषज्ञों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। मामले की जानकारी तहसील प्रशासन को दी गई है।
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400 साल पहले मेवाती लोगों को ठिकाना होती थी गढ़ी
नेहरू इंटर काॅलेज के प्रबंधक जय सिंह चौहान ने बताया कि करीब 400 साल पहले रनियां, सरवनखेड़ा, मनेथू, तिलौंची, सैथा, कौसम, बारा गांव में मेवाती जाति के लोग ऊंचे स्थानों पर मजबूत इमारत बनाकर रहते थे। जिन्हें गढ़ी कहा जाता था। मेवातियों के समय से कर न देने पर मुगलिया सल्तनत ने मेवातियों को भगाने के लिए चौहान क्षत्रिय जाति के लोगों से समझौता किया था। इसके बाद वह लोग यहां से भागकर दूसरे स्थानों पर बसे थे। जोकि आज भी 84 गांव के नाम से मशहूर है। उन्होंने कहा कि आशंका है कि यह सुरंग मेवातियों ने बनाई हो।
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बयान...
तिलौची गांव में जमीन में कई फीट गहरा गड्ढा मिला है। जिसे ग्रामीण सुरंग बता रहे हैं। इसको लेकर जिला स्तरीय अधिकारियों को पत्राचार किया जा रहा है। मामले की उच्चाधिकारियों के निर्देश पर जांच की जाएगी। - पवन कुमार, तहसीलदार अकबरपुर