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Fatehpur News: नहीं रहे शिक्षा की अलख जगाने वाले 102 वर्षीय ओमकार सिंह
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फाइल फोटो-01-ओमकार सिंह। स्रोत परिजन
- फोटो : reasi news
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खखरेरू। ग्रामीण अंचल में शिक्षा की अलख जगाने और बच्चों को शिक्षित करने के लिए जीवन समर्पित करने वाले शिक्षक ओमकार नाथ सिंह का 102 वर्ष की आयु में निधन हो गया। 18 अगस्त की सुबह उनके निधन की खबर मिलते ही क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। चित्रकूट के बऊपुर गांव में बेटी के निवास पर उनका अंतिम संस्कार विधि-विधान से किया गया।
ग्रामीणों के मुताबिक वर्ष 1952 में ओमकार सिंह ने जयरामपुर परिषदीय विद्यालय में सहायक शिक्षक के रूप में शिक्षण कार्य शुरू किया था। करीब चार दशक तक सेवा देने के बाद वर्ष 1992 में घरवासीपुर परिषदीय विद्यालय से प्रधानाध्यापक पद से सेवानिवृत्त हुए। इसके बाद भी शिक्षा के प्रति उनका समर्पण जारी रहा।
उन्होंने दरियामऊ, रक्षपालपुर, पंचमई, हरदासपुर, तेजनीपुर, बसवा, जयरामपुर, गुरगौला, तक्कीपुर, गुरसंडी और कठरिया समेत आसपास के गांवों के बच्चों को निशुल्क पढ़ाया। क्षेत्र में मास्टर साहब के नाम से प्रसिद्ध ओमकार सिंह ने ग्रामीण प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए स्वामीनारायण प्रतिभा खोज प्रतियोगिता शुरू कराने में भी अहम भूमिका निभाई।
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यह प्रतियोगिता आज भी आयोजित की जाती है। इसके माध्यम से मेधावियों को आगे बढ़ने का अवसर मिलता है। शिक्षा के प्रति उनका समर्पण इस बात से जाहिर होता है कि करीब 100 वर्ष की उम्र तक वह अपने पैतृक गांव गुरगौला में बच्चों को निशुल्क पढ़ाते रहे। शारीरिक दुर्बलता के कारण पुत्री उन्हें चित्रकूट के बऊपुर गांव ले गई थीं। यहां उनका निधन हो गया।
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ग्रामीणों के मुताबिक वर्ष 1952 में ओमकार सिंह ने जयरामपुर परिषदीय विद्यालय में सहायक शिक्षक के रूप में शिक्षण कार्य शुरू किया था। करीब चार दशक तक सेवा देने के बाद वर्ष 1992 में घरवासीपुर परिषदीय विद्यालय से प्रधानाध्यापक पद से सेवानिवृत्त हुए। इसके बाद भी शिक्षा के प्रति उनका समर्पण जारी रहा।
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उन्होंने दरियामऊ, रक्षपालपुर, पंचमई, हरदासपुर, तेजनीपुर, बसवा, जयरामपुर, गुरगौला, तक्कीपुर, गुरसंडी और कठरिया समेत आसपास के गांवों के बच्चों को निशुल्क पढ़ाया। क्षेत्र में मास्टर साहब के नाम से प्रसिद्ध ओमकार सिंह ने ग्रामीण प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए स्वामीनारायण प्रतिभा खोज प्रतियोगिता शुरू कराने में भी अहम भूमिका निभाई।
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यह प्रतियोगिता आज भी आयोजित की जाती है। इसके माध्यम से मेधावियों को आगे बढ़ने का अवसर मिलता है। शिक्षा के प्रति उनका समर्पण इस बात से जाहिर होता है कि करीब 100 वर्ष की उम्र तक वह अपने पैतृक गांव गुरगौला में बच्चों को निशुल्क पढ़ाते रहे। शारीरिक दुर्बलता के कारण पुत्री उन्हें चित्रकूट के बऊपुर गांव ले गई थीं। यहां उनका निधन हो गया।

फाइल फोटो-01-ओमकार सिंह। स्रोत परिजन- फोटो : reasi news