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Farrukhabad News: पांचाल घाट पुल के फुटपाथ का ज्वाइंट फिर खुला
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फर्रुखाबाद। इटावा-बरेली हाईवे पर गंगा नदी के ऊपर बने पांचाल घाट पुल की मरम्मत की हकीकत बृहस्पतिवार को फिर सामने आ गई। पुल के पश्चिमी हिस्से में फुटपाथ का ज्वाइंट खुलने से बड़ा गड्ढा हो गया। सरिया गलकर बाहर निकल आई हैं और नीचे का हिस्सा टूट जाने से गंगा का पानी दिखाई देने लगा है। ज्वाइंट से कंक्रीट टूटकर नीचे गिरने से गंगा स्नान और पूजन के लिए पहुंचे श्रद्धालु बाल-बाल बचे।
पांचाल घाट पुल से रोजाना करीब 18 हजार छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। भारी वाहनों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के कारण कई बार यातायात धीमा होने पर दोपहिया वाहन चालक और पैदल राहगीर फुटपाथ का इस्तेमाल करते हैं। क्षतिग्रस्त हिस्से से गुजरना जोखिम भरा हो गया है।
50 लाख खर्च फिर भी नहीं राहत
मार्च 2025 में पुल पर करीब एक माह तक यातायात बंद रखकर लगभग 50 लाख रुपये की लागत से मरम्मत कराई गई थी। 31 मार्च को यातायात बहाल होने के तीन माह बाद ही ज्वाइंट दोबारा खुल गए। इसके बाद यातायात डायवर्ट कर फिर मरम्मत कराई गई। जून में पुल के बीच ज्वाइंट और पटला हटने से बड़ा गड्ढा बन गया था। इसे आनन-फानन ठीक किया गया लेकिन कुछ दिन बाद गाटर और ज्वाइंट धंसने से सड़क का आधा हिस्सा प्रभावित हो गया था। अब फुटपाथ से कंक्रीट टूटकर गिरने से नीचे की ओर बैरिकेडिंग की गई है।
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स्थायी समाधान का इंतजार
पुल वर्ष 1971 में लोक निर्माण विभाग ने 750 मीटर लंबाई में बनवाया था। यह फर्रुखाबाद को बरेली, शाहजहांपुर, हरदोई, बदायूं और इटावा समेत कई जिलों से जोड़ता है। राहगीरों का कहना है कि लगातार मरम्मत के बावजूद समस्या दूर नहीं हो रही है। अस्थायी पैबंद लगाने के बजाय पुल की तकनीकी खामियों का स्थायी समाधान किया जाना चाहिए। पांचाल घाट पुल क्षेत्र की यातायात व्यवस्था के साथ सामरिक और आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। बड़ी संख्या में भारी और हल्के वाहन इसी मार्ग से गुजरते हैं।
एक-दो दिन में पूरा होगा काम
एनएचएआई के साइट इंजीनियर विश्वास मिश्रा ने बताया कि तकनीकी टीम को मौके पर लगाया गया है। एक-दो दिन में फुटपाथ की मरम्मत पूरी करा दी जाएगी। जहां सरिया दिखाई दे रही हैं, वहां प्लास्टर कराया जाएगा और क्षतिग्रस्त हिस्से को पुख्ता तरीके से ठीक किया जाएगा।
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पांचाल घाट पुल से रोजाना करीब 18 हजार छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। भारी वाहनों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के कारण कई बार यातायात धीमा होने पर दोपहिया वाहन चालक और पैदल राहगीर फुटपाथ का इस्तेमाल करते हैं। क्षतिग्रस्त हिस्से से गुजरना जोखिम भरा हो गया है।
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50 लाख खर्च फिर भी नहीं राहत
मार्च 2025 में पुल पर करीब एक माह तक यातायात बंद रखकर लगभग 50 लाख रुपये की लागत से मरम्मत कराई गई थी। 31 मार्च को यातायात बहाल होने के तीन माह बाद ही ज्वाइंट दोबारा खुल गए। इसके बाद यातायात डायवर्ट कर फिर मरम्मत कराई गई। जून में पुल के बीच ज्वाइंट और पटला हटने से बड़ा गड्ढा बन गया था। इसे आनन-फानन ठीक किया गया लेकिन कुछ दिन बाद गाटर और ज्वाइंट धंसने से सड़क का आधा हिस्सा प्रभावित हो गया था। अब फुटपाथ से कंक्रीट टूटकर गिरने से नीचे की ओर बैरिकेडिंग की गई है।
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स्थायी समाधान का इंतजार
पुल वर्ष 1971 में लोक निर्माण विभाग ने 750 मीटर लंबाई में बनवाया था। यह फर्रुखाबाद को बरेली, शाहजहांपुर, हरदोई, बदायूं और इटावा समेत कई जिलों से जोड़ता है। राहगीरों का कहना है कि लगातार मरम्मत के बावजूद समस्या दूर नहीं हो रही है। अस्थायी पैबंद लगाने के बजाय पुल की तकनीकी खामियों का स्थायी समाधान किया जाना चाहिए। पांचाल घाट पुल क्षेत्र की यातायात व्यवस्था के साथ सामरिक और आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। बड़ी संख्या में भारी और हल्के वाहन इसी मार्ग से गुजरते हैं।
एक-दो दिन में पूरा होगा काम
एनएचएआई के साइट इंजीनियर विश्वास मिश्रा ने बताया कि तकनीकी टीम को मौके पर लगाया गया है। एक-दो दिन में फुटपाथ की मरम्मत पूरी करा दी जाएगी। जहां सरिया दिखाई दे रही हैं, वहां प्लास्टर कराया जाएगा और क्षतिग्रस्त हिस्से को पुख्ता तरीके से ठीक किया जाएगा।