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Bareilly News: 40 खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को एलओसी देकर बरेली प्रदेश में अव्वल
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बरेली। खाद्य प्रसंस्करण उत्पादों के हब के तौर पर पहचान बना रहे बरेली के 40 निवेशकों को औद्योगिक विकास विभाग ने लेटर ऑफ कंफर्ट (एलओसी) जारी कर दिए हैं। यह प्रदेश में सर्वाधिक है। जिले में प्रसंस्करण इकाइयों की बढ़ती संख्या के साथ रोजगार की भी आस बढ़ रही है।
खाद्य प्रसंस्करण प्रशिक्षण संस्थान के प्रभारी प्रधानाचार्य अंशिल सिन्हा के मुताबिक, बरेली समेत बदायूं, शाहजहांपुर, पीलीभीत में मजबूत कृषि आपूर्ति शृंखला, मंडियां, कोल्ड चेन, डेयरी और बड़े उपभोक्ता बाजार प्रसंस्करण इकाइयों के बढ़ने की प्रमुख वजह हैं। इससे स्थानीय स्तर पर कृषि उत्पादों की सफाई, पैकेजिंग, प्रसंस्करण, भंडारण, मूल्य संवर्धन की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
पिछले वर्ष भी राज्य स्तरीय इंपॉवर्ड कमेटी ने मंडल की 50 खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के लिए 70 करोड़ के अनुदान को मंजूरी दी थी। जो संबंधित निवेशक के खाते में भेजी जा चुकी है।
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ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की नीति से बढ़ रहीं इकाइयां
अंंशिल के मुताबिक, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 औद्योगिक इकाइयों के विस्तार का आधार है। नई इकाई के संयंत्र, मशीनरी, सिविल, तकनीक कार्य पर 35 फीसदी (अधिकतम पांच करोड़ रुपये) की सब्सिडी मिलती है। भूमि खरीद पर सौ फीसदी स्टांप शुल्क और बाहरी विकास शुल्क पर 75 फीसदी, भूमि उपयोग परिवर्तन शुल्क पर 50 फीसदी छूट है। कोल्ड चेन व मूल्य संवर्धन अवस्थापना के लिए भी अनुदान का प्रावधान है। इन्वेस्ट यूपी के तहत गेहूं, गन्ना, आम, आलू, मटर, दुग्ध उत्पादन की तुलना में खाद्य प्रसंस्करण बढ़ाने की बड़ी संभावना है।
उद्यमी बोले- कच्चे माल की उपलब्धता से बढ़ रहे उद्योग
लघु उद्योग भारती के जिलाध्यक्ष आशुतोष शर्मा के मुताबिक खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को उद्योग नीतियों का लाभ मिल रहा है। मंडल अध्यक्ष संभव शील के मुताबिक मंडल में कच्चे माल की उपलब्धता से प्रसंस्करण इकाइयों के लिए अनुकूल माहौल है। खाद्य तेल, ब्रेड, रस्क, स्नैक्स, बिस्किट, कचरी, चिप्स, सोया, आचार, पापड़, फ्रोजन फूड्स आदि की एक हजार से ज्यादा इकाइयां मंडल में हैं। दुग्ध प्रसंस्करण की भी बड़े स्केल की इकाइयां स्थापित हो रही हैं।
इन इकाईयों को मिले लेटर ऑफ कंफर्ट
स्वाती तुलसी रिलायबल फूड्स (नमकीन व स्नैक्स), सृष्टिपूर्ति वेलनेस (मसाला प्रोसेसिंग), केजे फूड्स, साध्या प्रोडक्ट्स, आरएस महक ग्रुप, अलाउद्दीन शुगर इंडस्ट्रीज, गायत्री पल्सेस, बरेली आदर्श एग्रोटेक, प्योरलाल स्पाइसेज, न्यू सचिन नमकीन उद्योग, अरीना सोल्वेक्स, चंचला फूड, बिस्कॉन इंडस्ट्री, स्कैप्स फूड इंडिया, कनकधाम फूड्स, एमएस गली ग्रब इंडिया, मुरारी कोल्ड स्टोरेज, हरनाम दास फूड्स, क्रिएशन बायोटेक, ग्रोवर फूड्स, मसूही इंडस्ट्रीज, मीनाक्षी फ्रोजन, स्पाइस इंडस्ट्री, ग्रीन गोल्ड एग्रो, डीसीएन फूड एंड बेवरेज, आरएम फूड, बद्रीश एग्रो, खंश्याम, एआरएस फ्रोजन, बीजे इंडस्ट्री, एमएस इंडस्ट्री, श्री फूड, सार्थक ग्रोवनिक, कृषि डिस्क, एनडी इंटरनेशनल, एल्पीरील इंडस्ट्री, सृष्टीपूर्ति ओलियो रेसिन्स, एरेना सॉल्वेक्स, धीर फूड।
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खाद्य प्रसंस्करण प्रशिक्षण संस्थान के प्रभारी प्रधानाचार्य अंशिल सिन्हा के मुताबिक, बरेली समेत बदायूं, शाहजहांपुर, पीलीभीत में मजबूत कृषि आपूर्ति शृंखला, मंडियां, कोल्ड चेन, डेयरी और बड़े उपभोक्ता बाजार प्रसंस्करण इकाइयों के बढ़ने की प्रमुख वजह हैं। इससे स्थानीय स्तर पर कृषि उत्पादों की सफाई, पैकेजिंग, प्रसंस्करण, भंडारण, मूल्य संवर्धन की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
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पिछले वर्ष भी राज्य स्तरीय इंपॉवर्ड कमेटी ने मंडल की 50 खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के लिए 70 करोड़ के अनुदान को मंजूरी दी थी। जो संबंधित निवेशक के खाते में भेजी जा चुकी है।
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ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की नीति से बढ़ रहीं इकाइयां
अंंशिल के मुताबिक, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 औद्योगिक इकाइयों के विस्तार का आधार है। नई इकाई के संयंत्र, मशीनरी, सिविल, तकनीक कार्य पर 35 फीसदी (अधिकतम पांच करोड़ रुपये) की सब्सिडी मिलती है। भूमि खरीद पर सौ फीसदी स्टांप शुल्क और बाहरी विकास शुल्क पर 75 फीसदी, भूमि उपयोग परिवर्तन शुल्क पर 50 फीसदी छूट है। कोल्ड चेन व मूल्य संवर्धन अवस्थापना के लिए भी अनुदान का प्रावधान है। इन्वेस्ट यूपी के तहत गेहूं, गन्ना, आम, आलू, मटर, दुग्ध उत्पादन की तुलना में खाद्य प्रसंस्करण बढ़ाने की बड़ी संभावना है।
उद्यमी बोले- कच्चे माल की उपलब्धता से बढ़ रहे उद्योग
लघु उद्योग भारती के जिलाध्यक्ष आशुतोष शर्मा के मुताबिक खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को उद्योग नीतियों का लाभ मिल रहा है। मंडल अध्यक्ष संभव शील के मुताबिक मंडल में कच्चे माल की उपलब्धता से प्रसंस्करण इकाइयों के लिए अनुकूल माहौल है। खाद्य तेल, ब्रेड, रस्क, स्नैक्स, बिस्किट, कचरी, चिप्स, सोया, आचार, पापड़, फ्रोजन फूड्स आदि की एक हजार से ज्यादा इकाइयां मंडल में हैं। दुग्ध प्रसंस्करण की भी बड़े स्केल की इकाइयां स्थापित हो रही हैं।
इन इकाईयों को मिले लेटर ऑफ कंफर्ट
स्वाती तुलसी रिलायबल फूड्स (नमकीन व स्नैक्स), सृष्टिपूर्ति वेलनेस (मसाला प्रोसेसिंग), केजे फूड्स, साध्या प्रोडक्ट्स, आरएस महक ग्रुप, अलाउद्दीन शुगर इंडस्ट्रीज, गायत्री पल्सेस, बरेली आदर्श एग्रोटेक, प्योरलाल स्पाइसेज, न्यू सचिन नमकीन उद्योग, अरीना सोल्वेक्स, चंचला फूड, बिस्कॉन इंडस्ट्री, स्कैप्स फूड इंडिया, कनकधाम फूड्स, एमएस गली ग्रब इंडिया, मुरारी कोल्ड स्टोरेज, हरनाम दास फूड्स, क्रिएशन बायोटेक, ग्रोवर फूड्स, मसूही इंडस्ट्रीज, मीनाक्षी फ्रोजन, स्पाइस इंडस्ट्री, ग्रीन गोल्ड एग्रो, डीसीएन फूड एंड बेवरेज, आरएम फूड, बद्रीश एग्रो, खंश्याम, एआरएस फ्रोजन, बीजे इंडस्ट्री, एमएस इंडस्ट्री, श्री फूड, सार्थक ग्रोवनिक, कृषि डिस्क, एनडी इंटरनेशनल, एल्पीरील इंडस्ट्री, सृष्टीपूर्ति ओलियो रेसिन्स, एरेना सॉल्वेक्स, धीर फूड।