Baghpat Ground Report: ड्रोन से खेती से क्राइम जोन में शिक्षा तक, जानें कितना बदला बागपत जिला; देखें रिपोर्ट
Baghpat Ground Report: अमर उजाला की टीम ने 'सक्षम यूपी' कार्यक्रम के तहत बागपत जिले का दौरा कर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न सरकारी योजनाओं और विकास के दावों की जमीनी हकीकत को परखा। इस दौरे का उद्देश्य यह जानना था कि सरकार द्वारा किए गए विकास कार्यों का आम लोगों पर कितना और किस प्रकार का प्रभाव पड़ा है।
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विस्तार
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अब एक साल से भी कम समय बचा है। राज्य के राजनीतिक दलों ने अपनी चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में, अमर उजाला की टीम ने 'सक्षम यूपी' कार्यक्रम के तहत बागपत जिले का दौरा किया है। इस पड़ताल का मुख्य उद्देश्य सरकारी योजनाओं के आम जनजीवन पर पड़े असर को समझना था। टीम ने जिले में सरकार के विकास के दावों की जमीनी हकीकत जानने का प्रयास किया। यह दौरा आगामी विधानसभा चुनाव से पहले महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसका लक्ष्य सरकारी नीतियों के स्थानीय लोगों पर पड़े प्रभाव को समझना था। टीम ने विभिन्न क्षेत्रों में हुए विकास कार्यों की गहन समीक्षा की। पड़ताल का उद्देश्य यह जानना था कि सरकार द्वारा किए गए विकास के वादे कितने पूरे हुए हैं। यह पहल चुनावी माहौल में जनता के बीच सरकार के कामकाज का आकलन करेगी।
ओडीओपी से होम फर्निशिंग को मिली नई पहचान, जानें क्या बोले कारोबारी
ओडीओपी के आने से होम फर्निशिंग को कैसे लाभ मिला इसको लेकर उद्यमी हर्षित सिंघल ने बताया कि मैं 23 साल का हूं। मेरी कंपनी का नाम चाहत एक्सपोर्ट एलएलपी है। कंपनी की नीव हमने 2024 में रखी थी। प्लांट हमने जून में कमीशन कर दिया था। इंटरव्यू के लिए अमर उजाला को मैं बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं कि ऐसी आवाजों को वो आगे तक पहुंचा रहे हैं। आगे बताया कि फिलहाल अभी 350 लोग हमारी फैक्टरी में काम कर रहे हैं। हमने 350 लोगों को रखा हुआ है। आगे बताया कि कैसे सरकार से सहायता मिली थी। हर्षित ने कहा कि चाहत एक्सपोर्ट्स मेरे बाबा जी श्री राकेश सिंघल ने चालू करी थी 1988 में। पहले खड्डी हुआ करती थी। गांव में खेकड़ा में। वहां से उन्होंने फिर जहां अभी आप मेरा इंटरव्यू ले रहे हैं। यहां उन्होंने एक फैक्टरी चालू की। मेरे पापा दीपक सिंघल और मेरे चाचा संजय सिंघल काम को आगे बढ़ाया। धीरे-धीरे आगे बढ़त की और हम एक्सपोर्ट में आए। एक्सपोर्ट का मतलब होता है कि हम जो यहां बनाते हैं, सामान बनाते हैं, कपड़ा बनाते हैं, वो बाहर के देशों में उसको बेचते हैं। हमने उनसे कैपिटल सब्सिडी की मांग की। हमने यूपी गवर्नमेंट के साथ एक एमओयू भी साइन किया हुआ है। जिससे क्या है कि हमको जो अप्रूवल्स होती हैं, जो ब्यूरोक्रेसी होती है, उसका जो मूवमेंट होता है, वो फास्ट हो जाता है।
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सरकार से मिल रही सब्सिडी पर स्थानीय किसान से बातचीत
ड्रोन से खेती करने वाले किसान योगेद्र ने बताया कि दो साल से ड्रोन से खेती कर रहे हैं। इस साल भी ड्रोन से खेती करेंगे। ड्रोन से अच्छी खेती होती है। ये सबसे अच्छा तरीका है। इससे अच्छा स्प्रे होता है। दवा खराब नहीं होती। उतनी ही दवा से पूरा स्प्रे होता है। पानी कम लगता है। एक एकड़ में 10 लीटर पानी का छिड़काव होता है। अच्छी तकनीक है। किसानों को इससे खेतनी करनी चाहिए। सरकार पांच लाख तक की सब्सिडी दे रही है। इससे खेती करने से अच्छा परिणाम सामने आया। सरकार से मिले लाभ पर कहा कि सरकार ने बहुत सहयोग किया। हम लोगों को सरकार ने सब्सिडी दी है। सरकार अच्छा काम कर रही है। पहले और अब में बहुत अंतर है। पहले तो किसान को पता ही नहीं होता था कि अंतर क्या है। अब सरकार ने किसानों को जागरूक किया। सब्सिडी पर बहुत अंतर दे रहे हैं।
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यहां कम फीस में छात्रों को अच्छी शिक्षा मिल रही, जानें क्या बोले सह प्राध्यापक डॉ. राजेश कुमार
बागपत में नया डिग्री कॉलेज मिलने पर सह प्राध्यापक डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि मैं सम्राट मिरर राजकीय सम्राट मिहिर भोज राजकीय महाविद्यालय पावला बागपद में सीनियर मोस्ट टीचर होने के नाते कार्यवाहक प्राचार्य के पद पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहा हूं। यह यूजी कॉलेज है। जहां तीन संकायएं हैं। कला संकाय, वाणिज्य संकाय और विज्ञान संकाय। कला संकाय में आठ सब्जेक्ट्स हैं। हिंदी, अंग्रेजी, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, दर्शनशास्त्र, भूगोल, इतिहास और संस्कृत। विज्ञान संकाय में गणित वर्ग और बायो वर्ग दोनों है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्र-छात्राओं को बहुत कम फीस पर शिक्षण शिक्षा ग्रहण करने के लिए यहां पर एक तरह से अवसर मिला है, जो छात्र-छात्राएं 15-20 किलोमीटर दूर शहर में जाते थे। यहां सरकारी महाविद्यालय खुलने से एक कम फीस में बहुत क्वालिटी वाइज शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिला है। यहां पर आज जरूरत के हिसाब से शिक्षा है। सरकार स्किल डेवलप के नाम पर कई काम कर रही है। इससे रोजगार के अवसर भी प्राप्त होते हैं।
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