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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी: नगर निगम-एएमयू विवाद में 27 अगस्त को अगली सुनवाई, महापौर को दिखाए जमीन के दस्तावेज

Sun, 23 Aug 2026 05:46 PM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Sun, 23 Aug 2026 05:46 PM IST
सार
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एएमयू और नगर निगम के बीच जमीन को लेकर चल रहा विवाद अब और तूल पकड़ता नजर आ रहा है। इसी सिलसिले में प्रॉक्टर प्रो. मोहम्मद नवेद खान सहित अन्य अधिकारियों ने महापौर प्रशांत सिंघल से मुलाकात की। एएमयू अधिकारियों ने जमीन से संबंधित दस्तावेज महापौर के समक्ष प्रस्तुत करते हुए जमीन पर यूनिवर्सिटी के स्वामित्व का दावा किया।

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Aligarh Muslim University and Municipal Corporation land dispute
एएमयू बाब ए सैय्यद गेट - फोटो : संवाद

विस्तार

अलीगढ़ के नगला पटवारी क्षेत्र की लगभग 3.863 हेक्टेयर जमीन, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 500 करोड़ रुपये है, को लेकर नगर निगम और एएमयू के बीच छिड़ी कानूनी जंग में शनिवार को एसडीएम के यहां सुनवाई हुई। एसडीएम कोल डॉ. गजेंद्र पाल सिंह ने दोनों पक्षों को औपचारिक नोटिस जारी कर दिए हैं। इस मामले की अगली सुनवाई अब 27 अगस्त को तय की गई है।

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नगर निगम की ओर से नगर आयुक्त और एएमयू की ओर से रजिस्ट्रार के नाम आधिकारिक नोटिस जारी किए गए हैं। न्यायालय ने दोनों पक्षों को अपने-अपने दावों के समर्थन में पुख्ता अभिलेख और दस्तावेज पेश करने के निर्देश दिए हैं, ताकि मालिकाना हक की स्थिति साफ हो सके। इस पूरे प्रकरण में प्रशासनिक जांच के दौरान एक नया पहलू सामने आया है। अब तक एएमयू प्रशासन की ओर से यह दावा किया जा रहा था कि इस जमीन को लेकर पिछले वर्ष मई से ही एसडीएम न्यायालय में मुकदमा लंबित है। हालांकि, जब प्रशासनिक दस्तावेजों की पड़ताल की गई, तो यह स्पष्ट हुआ कि पिछले साल मई में एएमयू ने एसडीएम न्यायालय में कोई नियमित वाद दायर ही नहीं किया था।
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उस समय एएमयू की तरफ से केवल तहसीलदार के समक्ष एक प्रार्थना पत्र दिया गया था, जिसमें राजस्व अभिलेखों में सुधार के लिए वाद दर्ज करने की मांग की गई थी। उस प्रार्थना पत्र पर तहसीलदार ने लेखपाल और कानूनगो से रिपोर्ट तलब की थी, लेकिन तब कोई नियमित मुकदमा शुरू नहीं हुआ था और मामला प्रक्रिया में ही अटका रहा था। अब जाकर विधिवत रूप से नया वाद दर्ज किया गया है।
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शुक्रवार को एएमयू के रजिस्ट्रार की ओर से एसडीएम कोल न्यायालय में वाद दायर करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसके बाद शनिवार को एसडीएम कोल डॉ. गजेंद्र पाल सिंह ने मामले की सुनवाई की। एसडीएम कोल गजेंद्र सिंह ने बताया कि न्यायालय ने साफ किया है कि दोनों पक्षों द्वारा अपने-संबद्ध दस्तावेज और राजस्व रिकॉर्ड पेश किए जाने के बाद ही जमीन के असली स्वामित्व और राजस्व अभिलेखों की वास्तविक स्थिति का खुलासा हो सकेगा।

एएमयू ने महापौर को दिखाए जमीन के दस्तावेज
एएमयू और नगर निगम के बीच जमीन को लेकर चल रहा विवाद अब और तूल पकड़ता नजर आ रहा है। इसी सिलसिले में एएमयू के प्रॉक्टर प्रो. मोहम्मद नवेद खान सहित अन्य अधिकारियों ने महापौर प्रशांत सिंघल से मुलाकात की। एएमयू अधिकारियों ने जमीन से संबंधित दस्तावेज महापौर के समक्ष प्रस्तुत करते हुए जमीन पर यूनिवर्सिटी के स्वामित्व का दावा किया।

एएमयू और नगर निगम दोनों सरकारी संस्थान हैं। एएमयू के प्रॉक्टर सहित अन्य अधिकारियों ने जमीन को लेकर अपने दस्तावेज दिखाए हैं। वर्ष 1925 से यह जमीन विश्वविद्यालय की है। इस मामले में जिलाधिकारी की ओर से जांच बैठाई गई है और अब जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।-प्रशांत सिंघल, महापौर
एएमयू की जमीन को नगर निगम अपना बता रहा है, जो गलत है। यह जमीन वर्ष 1925 से यूनिवर्सिटी की है। बिना किसी नोटिस के नगर निगम द्वारा जमीन पर बोर्ड लगाया जाना उचित नहीं है। महापौर को जमीन से संबंधित दस्तावेज दिखाकर मामले में निष्पक्ष कार्रवाई कराने का अनुरोध किया गया है।-प्रो. मोहम्मद नवेद खान, प्रॉक्टर, एएमयू


एएमयू की जमीन बचाने सड़क पर उतरेंगे शिक्षक
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) की जमीन और विरासत के संरक्षण को लेकर अब शिक्षक भी मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। नगर निगम और एएमयू के बीच करीब 500 करोड़ रुपये मूल्य की 3.76 हेक्टेयर जमीन को लेकर चल रहे विवाद के बीच एएमयू टीचर्स एसोसिएशन (अमुटा) ने आंदोलन की रणनीति पर मंथन शुरू कर दिया है। अमुटा पदाधिकारियों की सोमवार को स्टाफ क्लब में सुबह 11 बजे बैठक होगी।

यूनिवर्सिटी की जमीन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के साथ भूमि और एएमयू की विरासत को संरक्षित रखने की आगे की रणनीति तय की जाएगी। अमुटा के सचिव डॉ. अशरफ मतीन ने बताया कि बैठक के बाद शिक्षक बेगम सुल्तान जहां हॉल तक पैदल मार्च निकालेंगे। मार्च के जरिये यूनिवर्सिटी की जमीन और विरासत की सुरक्षा को लेकर एकजुटता का संदेश दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि एएमयू की भूमि केवल संपत्ति नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक विरासत और पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए इसके संरक्षण और भविष्य में सुरक्षित रखने को लेकर ठोस रणनीति पर विचार किया जाएगा। जमीन के विवाद के बीच शिक्षकों के सड़क पर उतरने की तैयारी से एएमयू में यह मुद्दा और गरमाने के संकेत मिल रहे हैं।

अब खुर्द-बुर्द हुई जमीन की सीबीआई जांच की मांग
एएमयू की जमीन को लेकर चल रहे विवाद के बीच यूनिवर्सिटी प्रशासन ने शिक्षक संघ (अमुटा) समेत अलग-अलग एसोसिएशन के पदाधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में यूनिवर्सिटी की जमीनों की सुरक्षा और उनके स्वामित्व से जुड़े मामलों पर चर्चा हुई। एएमयू के प्रॉक्टर प्रो. मोहम्मद नवेद खान ने विभिन्न एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर जमीनों से संबंधित स्थिति और आगे की रणनीति पर विचार-विमर्श किया।

बैठक के बाद अमुटा सचिव डॉ. अशरफ मतीन ने कहा कि यूनिवर्सिटी की सतर्कता के चलते भमोला में जमीन जाने से बच गई। उन्होंने दावा किया कि यूनिवर्सिटी की ऐसी कई जमीन हैं, जो खुर्द-बुर्द हो गई हैं। इनमें अहमदी विजुअली चैलेंज्ड स्कूल के पास की जमीन भी है। इसी तरह सिटी स्कूल की जमीन को लेकर भी सवाल उठे हैं। अहमदी विजुअली चैलेंज्ड स्कूल और सिटी स्कूल से संबंधित जमीनों के मामलों की सीबीआई से जांच कराई जानी चाहिए, ताकि पूरे मामले की निष्पक्षता से जांच हो सके और जमीनों की वास्तविक स्थिति सामने आए।

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