WhatsApp: 350 करोड़ लोगों के व्हाट्सएप डेटा लीक होने का क्या है सच? जानिए मेटा ने क्या कहा
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व्हाट्सएप में करीब 3.5 अरब लोगों के फोन नंबर और उनकी प्रोफाइल फोटो लीक होने का दावा किया जा रहा है। आखिर इस वायरल दावे की किया सच्चाई है? आइए जानते हैं।

विस्तार
वाट्सएप में करीब 3.5 अरब लोगों के फोन नंबर और उनकी पर्सनल जानकारी लीक होने का दावा किया जा रहा है। खबरें इतनी वायरल हुईं कि व्हाट्सएप की पेरेंट कंपनी मेटा को खुद स्पष्टिकरण जारी करना पड़ा। व्हाट्सएप का कहना है कि यह खोज एक बग बाउंटी प्रोग्राम के तहत की गई थी जिसे अब ठीक कर दिया गया है। तो चलिए जानते हैं व्हाट्सएप में ऐसा क्या हुआ जो डेटा लीक होने की खबरें वायरल होने लगीं।
क्या है बग बाउंटी प्रोग्राम
व्हाट्सएप का बग बाउंटी प्रोग्राम एक सुरक्षा पहल है जिसमें साइबर विशेषज्ञों को ऐप में सुरक्षा कमजोरियों (बग) की रिपोर्ट करने के लिए इनाम दिया जाता है। इस कार्यक्रम के तहत, जब कोई शोधकर्ता बग का पता लगाता है और उसकी विस्तृत रिपोर्ट प्रदान करता है, तो कंपनी उसे सत्यापित करने के बाद इनाम देती है। यह प्रोग्राम मेटा (Meta) द्वारा चलाया जाता है और इसका उद्देश्य सुरक्षा को बेहतर बनाना है।
व्हाट्सएप में क्या कमी आई सामने?
हाल ही में वियना विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं की एक टीम ने एक खामी का पता लगाया जिसमें व्हाट्सएप यूजर्स के फोन नंबरों और सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध प्रोफाइल जानकारी को बड़े पैमाने पर स्क्रैप (डेटा निकालने की प्रक्रिया) किया जा सकता था। इसी कमजोरी का इस्तेमाल करके वियना यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक बहुत आसान तकनीक से पूरी दुनिया के अरबों फोन नंबर स्क्रैप कर लिए। वे हर घंटे बिना किसी रोक-टोक के लाखों नंबर चेक कर पाते थे। इस तकनीक से उन्हें कई अकाउंट्स की प्रोफाइल फोटो, कई अकाउंट्स के स्टेटस/टेक्स्ट भी मिल गए। शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर यह तरीका गलत हाथों में चला जाता, तो यह "इतिहास का सबसे बड़ा डाटा लीक" बन सकता था।
यह खामी कब से थी?
शोधकर्ताओं के अनुसार, यह कमजोरी कम से कम 2017 से मौजूद थी। मेटा को पहले भी डाटा स्क्रैपिंग को लेकर ऐसी आशंकाओं की जानकारी दी जा चुकी थी। व्हाट्सएप का कॉन्टैक्ट-डिस्कवरी फीचर यूजर की एड्रेस बुक सिंक करने के लिए बना है लेकिन अनजाने में यह बड़े पैमाने पर डाटा निकालने का जरिया बन गया था।
मेटा ने घटना पर क्या कहा?
मेटा ने माना कि यह एक डिजाइन गलती थी, लेकिन अब इसे रेट-लिमिट लगाकर ठीक कर दिया गया है। कंपनी का कहना है कि उन्हें गलत इस्तेमाल का कोई सबूत नहीं मिला, मैसेज सुरक्षित रहे क्योंकि वे एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड थे, फोन नंबर और प्रोफाइल फोटो जैसे वही डाटा दिखाई दे रहे थे जिसे 'पब्लिक' माना जाता है। उन्होंने इस खामी की जानकारी मेटा को दे दी। अध्ययन पूरा होने के बाद उन्होंने बनाया हुआ पूरा डाटा डिलीट कर दिया। मेटा को इस समस्या को ठीक करने में करीब छह महीने लगे। वाट्सएप के इंजीनियरिंग वॉइस प्रेसिडेंट नितिन गुप्ता ने कहा कि यह स्टडी उनके नए सुरक्षा सिस्टम की टेस्टिंग में मददगार रही।