AI Chatbots: बच्चों में एआई चैटबॉट्स की लत लगाने वाले फीचर्स होंगे बैन, अमेरिका में 'एडिक्टिव डिजाइन' बिल पेश

नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीनीतीश कुमार
Tue, 28 Jul 2026 12:47 PM IST
सार

बच्चे अपनी मानसिक उलझनों के लिए आजकल एआई (AI) चैटबॉट्स का सहारा ले रहे हैं। लेकिन क्या ये मशीनें उन्हें सही राह दिखा रही हैं या अपनी 'लत' का शिकार बना रही हैं? अमेरिका में पेश हुआ नया 'एडिक्टिव डिजाइन एक्ट' टेक कंपनियों की इसी मनमानी पर रोक लगाने जा रहा है।

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us introduces addictive design act to protect kids from ai chatbots addiction
बच्चों को लग रही एआई चैटबॉट्स की लत - फोटो : Adobe Stock

    विस्तार

    आज के डिजिटल युग में, जब कोई किशोर मानसिक उथल-पुथल या तनाव से गुजरता है, तो वह अक्सर इंसानों से बात करने के बजाय 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (AI) चैटबॉट्स की शरण में चला जाता है। मशीनें वाकई एक दोस्त की तरह मदद कर रही हैं, या फिर हमें एक खतरनाक लत की ओर धकेल रही हैं, ये वाकई में एक गंभीर सवाल बना हुआ है। इसी गंभीर खतरे को भांपते हुए अमेरिका में एक बेहद अहम विधेयक पेश किया गया है, जो एआई (AI) कंपनियों की जवाबदेही तय करने और उनकी मनमानी पर लगाम लगाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

    अमेरिका के वर्मोंट से डेमोक्रेटिक प्रतिनिधि बेका बालिंट ने 'एडिक्टिव डिजाइन एक्ट' नाम से यह बिल पेश किया है। इस बिल का सीधा सा उद्देश्य टेक कंपनियों को ऐसे एआई फीचर्स बनाने से रोकना है, जो नाबालिगों को मानसिक और भावनात्मक रूप से इन मशीनों पर निर्भर बना देते हैं।

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    बच्चों को लग रही एआई चैटबॉट्स की लत
    बच्चों को लग रही एआई चैटबॉट्स की लत - फोटो : Adobe Stock

    बालिंट के कार्यालय ने एक बेहद डराने वाली सच्चाई की ओर इशारा करते हुए कहा कि आज मौजूद ज्यादातर एआई चैटबॉट इस तरह से डिजाइन ही नहीं किए गए हैं कि वे अवसाद या मानसिक संकट से जूझ रहे किसी बच्चे को सुरक्षित और सही सलाह दे सकें। इसके उलट, ये बच्चों को अपना आदी बना रहे हैं।

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    क्यों लाया गया यह विधेयक?

    • हाल के समय में बड़ी संख्या में किशोर मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सलाह या भावनात्मक सहारे के लिए एआई चैटबॉट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि, सांसद बालिंट का कहना है कि अधिकांश एआई चैटबॉट ऐसे संवेदनशील मामलों को सुरक्षित और जिम्मेदारी से संभालने के लिए तैयार नहीं किए गए हैं।
    • उनके अनुसार, टेक कंपनियों ने वर्षों तक यूजर्स का ध्यान लंबे समय तक बनाए रखने की तकनीक विकसित की है। यही रणनीति मानसिक तनाव से गुजर रहे बच्चों पर लागू नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि एआई के मामले में वही गलती दोहराने से बचना होगा, जो पहले सोशल मीडिया के साथ हुई थी।
    लत लगाने वाले सिस्टम का इस्तेमाल करती है कंपनियां
    लत लगाने वाले सिस्टम का इस्तेमाल करती है कंपनियां - फोटो : अमर उजाला (एआई जनरेटेड)

    किन फीचर्स पर लग सकती है रोक?

    विधेयक में कई ऐसे फीचर्स को संभावित रूप से 'लत लगाने वाला' माना गया है जो यूजर्स को लगातार चैट जारी रखने के लिए प्रेरित करते हैं। इनमें टाइपिंग बबल्स, इंसानों जैसे अवतार, पिछली बातचीत के आधार पर निजी जानकारी का इस्तेमाल, बातचीत जारी रखने के लिए भुगतान या अतिरिक्त जुड़ाव की शर्त, दो घंटे से अधिक लगातार चैट की अनुमति और किसी वास्तविक व्यक्ति की तरह खुद को पेश करना शामिल है।

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