Data Centres: यूएस-ईरान युद्ध में नया निशाना बने डेटा सेंटर, डिजिटल ढांचे पर बढ़ा खतरा

Nitish Kumar
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीNitish Kumar
Fri, 13 Mar 2026 06:01 AM IST
सार

मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध अब डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तक पहुंच गया है। हालिया हमलों में Amazon के कुछ डेटा सेंटर क्षतिग्रस्त हुए हैं, जबकि ईरान और इजरायल में भी डेटा सेंटर निशाने पर आए हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, युद्ध में डेटा सेंटर अब रणनीतिक लक्ष्य बनते जा रहे हैं।

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डेटा सेंटर (सांकेतिक) - फोटो : एआई जनरेटेड

    विस्तार

    इतिहास में युद्ध के दौरान दुश्मन की ताकत कमजोर करने के लिए पानी के स्रोतों को जहरीला करने, पुल जलाने या रेलवे और एयरपोर्ट जैसे ढांचों पर हमले किए जाते रहे हैं। लेकिन मिडिल ईस्ट में चल रहे मौजूदा संघर्ष में डेटा सेंटर अब एक नया लक्ष्य बनकर सामने आ गया है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक Amazon के तीन डेटा सेंटर यूएई और बहरीन में ड्रोन हमलों से प्रभावित हुए हैं। वहीं इस्त्रायल और अमेरिका की कार्रवाई में तेहरान में कम से कम दो डेटा सेंटर को निशाना बनाया गया, जिनमें से एक का संबंध ईरान की सेना (IRGC) से बताया जा रहा है।

    डेटा सेंटर पर हमला क्यों है खतरनाक

    डेटा सेंटर पर हमला किसी देश की डिजिटल और आर्थिक गतिविधियों को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है। अगर डेटा सेंटर कुछ मिनट के लिए भी बंद हो जाए तो इससे बैंकों, सरकारी दफ्तरों और उद्योगों का काम ठप हो सकता है और कंपनियों को लाखों डॉलर का नुकसान उठाना पड़ सकता है।

    आज की आधुनिक सैन्य तकनीक में क्लाउड कंप्यूटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। इनका उपयोग निगरानी, ड्रोन नेविगेशन और सैटेलाइट डेटा के विश्लेषण में किया जाता है। इसी वजह से डेटा सेंटर अब सिर्फ व्यावसायिक ढांचा नहीं बल्कि रणनीतिक संसाधन माने जाने लगे हैं।

    खाड़ी देशों में तेजी से बढ़े डेटा सेंटर

    पिछले कुछ वर्षों में कई अमेरिकी टेक कंपनियों ने खाड़ी क्षेत्र में अपने डेटा सेंटर स्थापित किए हैं। सस्ती ऊर्जा और पर्याप्त जमीन मिलने की वजह से यह इलाका क्लाउड सेवाओं के लिए आकर्षक बन गया है।

    रिसर्च फर्म DC Byte के अनुसार खाड़ी क्षेत्र के छह अरब देशों में करीब 230 डेटा सेंटर बन चुके हैं या निर्माणाधीन हैं। इनमें से कुछ ही डेटा सेंटर पूरी तरह अमेरिकी कंपनियों के स्वामित्व में हैं और उनमें से तीन वही हैं जिन पर हालिया हमले हुए।

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