माइक्रोसॉफ्ट CEO सत्या नडेला ने प्यार के लिए ठुकरा दिया था ग्रीन कार्ड, किताब में हुआ खुलासा

अमेरिका में ड्रीम्स के प्रतीक जिस ग्रीन कार्ड को हासिल करने के लिए लोग एड़ी-चोट का जोर लगा देते हैं, उसे माइक्रोसॉफ्ट के चीफ सत्या नडेला ने अपने प्रेम के लिए ठुकरा दिया था। जब यह ग्रीन कार्ड नडेला की नवविवाहिता पत्नी के अमेरिका निवास की राह में रोड़ा बनता दिखा तो उन्होंने इसे सरेंडर कर एच1-बी वीजा के लिए अप्लाई कर दिया। नडेला के इस कदम ने उन्हें माइक्रोसॉफ्ट के रिचमोंड कैंपस में कुख्यात कर कर दिया था।
भारत में पैदा हुए माइक्रोसॉफ्ट सीईओ नडेला के मुताबिक उनके शुरुआती कॅरियर में एक वक्त ऐसा आया था, जब उनके हाथ में ग्रीन कार्ड था और और वह माइक्रोसॉफ्ट की नौकरी छोड़ कर भारत लौटने की सोच रहे थे। ऐसा इसलिए उस समय उनकी नई-नई शादी हुई थी और अमेरिकी कानून के मुताबिक उनकी पत्नी उनके साथ सिएटल आकर नहीं रह सकती थीं। उस समय के अमेरिकी कानून के मुताबिक अगर ग्रीन कार्ड होल्डर शादी करता था तो उसके जीवनसाथी का वीजा रद्द कर दिया जाता था। यह नियम आज भी जारी है।
पत्नी को अमेरिका लाने के लिए एच1-बी के लिए दिया आवेदन

अमेरिका में रविवार रिलीज हुई नडेला ने अपनी किताब ‘हिट रिफ्रेश’ में लिखा है कि आखिर उन्होंने क्यों बेशकीमती ग्रीन कार्ड छोड़ कर अमेरिका में टेंपररी स्टेटस के वीजा के लिए आवेदन किया था। नडेला लिखते हैं, उन्होंने 1993 में अनु से शादी की। शादी के बाद वह पत्नी (अनु) को अमेरिका लाना चाहते थे। एच1-बी के नियमों के मुताबिक पति या पत्नी अगर अमेरिका में काम करते हों तो वो अपने जीवनसाथी को यहां ला सकते हैं। लेकिन ग्रीन कार्ड होल्डर नहीं। उन्होंने लिखा है, ‘अमेरिका के अजीब इमिग्रेशन लॉ को लेकर मैं कुछ नहीं कर सकता था। अनु मेरी प्राथमिकता थी। लेकिन इसी अजीब आप्रवास कानून ने मेरे लिए अनु को यहां लाने का रास्ता खोल दिया।’
किताब के मुताबिक नडेला जून 1994 में दिल्ली स्थिति अमेरिकी दूतावास गए और वहां फ्रंट डेस्क पर बैठे क्लर्क से कहा कि वह ग्रीन कार्ड सरेंडर कर एच-1बी वीजा के लिए आवेदन करना चाहते हैं। यह सुन कर क्लर्क भी भौचक रह गया। नडेला कहते हैं, ‘मैंने उससे अमेरिका के अजीब इमिग्रेशन लॉ के बारे में बात की। उसने सहमति में सिर हिलाया और मेरे आगे एक फॉर्म सरका दिया। सौभाग्य से मेरा यह कदम सही साबित हुआ। अनु मेरे साथ सिएटल आ गई, जहां हमने जिंदगी की एक नई शुरुआत की। लेकिन ग्रीन कार्ड छोड़ने के मेरे फैसले ने मुझे माइक्रोसॉफ्ट के रेचमोंड कैंपस में कुख्यात कर दिया। हर कोई मेरा परिचय यह कह कर देता था यह वही शख्स है, जिसने ग्रीन कार्ड सरेंडर कर दिया। हर दूसरे दिन कोई न कोई मुझे समझाता था।
एच-1बी छोड़ने वाले कुणाल बहल ने खड़ी की स्नैपडील

नडेला ने कभी अपने साथ कम करने वाले कुणाल बहल का जिक्र किया है, जिनका एच-1बी वीजा खत्म हो गया था और ग्रीन कार्ड आया नहीं था। इस चक्कर में वह भारत चले आए और फिर स्नैपडील कंपनी बनाई, जो बाद में बढ़ कर एक अरब डॉलर की कंपनी हो गई। नडेला की जिंदगी में स्नैपडील जैसी क्लाउड कंपनियों और फिर माइक्रोसॉफ्ट ने अहम भूमिका अदा की।
हैदराबाद के लिए क्रिकेट खेलना चाहते थे
नडेला हैदराबाद पब्लिक स्कूल के छात्र थे। 12वीं तक उनका सपना हैदराबाद के लिए क्रिकेट खेलना और बैंक में नौकरी करना था। उनकी मां को यह आइडिया पसंद था लेकिन पिता उन्हें हैदराबाद से बाहर जाने को कहते थे। हालांकि नडेला ने कभी नहीं सोचा था कि वह अमेरिका आ जाएंगे।