रेलवे की चादरों पर अब AI की नजर: दाग पकड़ेंगे स्मार्ट कैमरे, CCTV से होगी लॉन्ड्री की हर गतिविधि की निगरानी

नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीनीतीश कुमार
Mon, 27 Jul 2026 11:37 AM IST
सार

ट्रेन में मिलने वाली बेडशीट और तकिए के कवर की सफाई को लेकर यात्रियों की शिकायतें अब कम हो सकती हैं। भारतीय रेलवे ने लॉन्ड्री में AI कैमरों और CCTV की मदद से लिनेन की गुणवत्ता जांचने की नई शुरुआत की है।

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भारतीय रेलवे (सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला (एआई जनरेटेड)

    विस्तार

    अगर आपने कभी ट्रेन की एसी बोगी में मिली बेडशीट या तकिए के कवर की सफाई को लेकर सवाल उठाया है, तो अब भारतीय रेलवे आपकी इस चिंता को तकनीक के जरिए दूर करने की तैयारी में है। रेलवे ने पहली बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से धुले हुए लिनेन की गुणवत्ता जांचने की पहल शुरू की है। अब स्मार्ट कैमरे यह पहचान सकेंगे कि चादरों पर कहीं दाग तो नहीं रह गए और पूरी धुलाई सही तरीके से हुई है या नहीं।

    रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में जानकारी दी कि फिलहाल यह AI आधारित स्टेन डिटेक्शन सिस्टम पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सेंट्रल रेलवे के पुणे मंडल और नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे के जयपुर व जोधपुर मंडल की मैकेनाइज्ड लॉन्ड्रियों में शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य यात्रियों को पहले से अधिक साफ और स्वच्छ लिनेन उपलब्ध कराना है।

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    AI कैमरे करेंगे दाग की पहचान

    नई तकनीक के तहत लॉन्ड्री में लगाए गए AI कैमरे धुलाई के बाद बेडशीट, तकिए के कवर और अन्य लिनेन की तस्वीरों का विश्लेषण करेंगे। यदि किसी कपड़े पर दाग या गंदगी बची होगी, तो सिस्टम उसे तुरंत चिन्हित कर देगा। इससे खराब गुणवत्ता वाले लिनेन यात्रियों तक पहुंचने से पहले ही अलग किए जा सकेंगे।

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    CCTV से होगी पूरी लॉन्ड्री की निगरानी

    रेलवे ने सिर्फ AI कैमरों पर ही भरोसा नहीं किया है। देशभर की मैकेनाइज्ड लॉन्ड्रियों में CCTV कैमरे भी लगाए गए हैं, ताकि धुलाई की पूरी प्रक्रिया पर नजर रखी जा सके। इसके अलावा, सफाई की गुणवत्ता जांचने के लिए 'व्हाइटो-मीटर' (Whito-Meters) मशीनों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है, जो यह सुनिश्चित करती हैं कि लिनेन तय मानकों के अनुसार साफ हुआ है।

    बेडरोल में क्या-क्या मिलता है?

    रेलवे के अनुसार, एसी कोच के प्रत्येक बेडरोल पैक में यात्रियों को दो बेडशीट, एक तकिए का कवर और एक हैंड टॉवल दिया जाता है।

    इनमें से एक बेडशीट सीट पर बिछाने के लिए होती है, जबकि दूसरी चादर कंबल और शरीर के बीच इस्तेमाल करने के लिए दी जाती है, ताकि कंबल सीधे शरीर के संपर्क में न आए। इस कंबल कवर शीट को हर इस्तेमाल के बाद धोया जाता है।

    अब सभी यात्रियों को मिलेगा ब्लैंकेट कवर

    यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए रेलवे ने एक और नई पहल शुरू की है। फिलहाल नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे की ट्रेनों और कामाख्या-हावड़ा वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में सफर करने वाले सभी एसी यात्रियों को ब्लैंकेट कवर उपलब्ध कराया जा रहा है। रेलवे के मुताबिक इस सुविधा को यात्रियों से अच्छी प्रतिक्रिया मिली है।

    पुराने लिनेन को समय पर किया जाता है बदल

    रेल मंत्री ने बताया कि रेलवे के नियमों के तहत प्रत्येक लिनेन आइटम की एक निर्धारित उपयोग अवधि तय होती है। समय-समय पर उसकी स्थिति की समीक्षा की जाती है और जो लिनेन इस्तेमाल के लायक नहीं रहता, उसे तय नियमों के अनुसार बदल दिया जाता है।

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