बड़ी खबर: 1 अप्रैल से 'ई-अराइवल कार्ड' हुआ अनिवार्य, भारत आने पर अब नहीं भरना होगा कागजी फॉर्म

Nitish Kumar
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीNitish Kumar
Wed, 01 Apr 2026 04:56 PM IST
सार

India e-Arrival Card:

भारत सरकार 1 अप्रैल 2026 से इंटरनेशनल यात्रियों के लिए ई-अराइवल कार्ड अनिवार्य करने जा रही है। यह नया डिजिटल सिस्टम इमिग्रेशन प्रक्रिया को तेज और आसान बनाने के लिए लाया गया है, जिससे एयरपोर्ट पर लंबी लाइनों से राहत मिलेगी।

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हवाईअड्डा - फोटो : एएनआई (फाइल)

    विस्तार

    भारत अब अपने एयरपोर्ट सिस्टम को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसी कड़ी में सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए e-Arrival Card को अनिवार्य कर दिया है। अब विदेश से भारत आने वाले यात्रियों को फ्लाइट बोर्ड करने से पहले यह डिजिटल फॉर्म भरना जरूरी होगा। यह पासपोर्ट और वीजा की तरह ही एक जरूरी दस्तावेज बन जाएगा।

    क्या है e-Arrival Card?

    e-Arrival Card एक डिजिटल फॉर्म है, जो पहले इस्तेमाल होने वाले पेपर डिसएम्बार्केशन फॉर्म की जगह लेगा। अब एयरपोर्ट या फ्लाइट में कोई कागजी फॉर्म नहीं मिलेगा।

    कब और कैसे भर सकते हैं फॉर्म?

    यात्रियों को भारत पहुंचने से 72 घंटे पहले यह फॉर्म ऑनलाइन भरना होगा। फॉर्म सबमिट करने के बाद एक QR कोड मिलेगा, जिसे एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन के समय दिखाना होगा।

    किसे भरना होगा यह फॉर्म?

    यह नियम विदेशी नागरिकों और OCI कार्डहोल्डर्स पर लागू होगा। भारतीय नागरिकों को यह फॉर्म भरने की जरूरत नहीं है। खास बात यह है कि एक परिवार के पांच सदस्य एक ही फॉर्म में अपनी जानकारी भर सकते हैं।

    किन जानकारियों की होगी जरूरत?

    फॉर्म में पासपोर्ट डिटेल, फ्लाइट जानकारी, संपर्क विवरण, भारत आने का उद्देश्य और ठहरने का पता जैसी बेसिक जानकारी देनी होगी। इसमें कोई डॉक्यूमेंट अपलोड करने की जरूरत नहीं होगी।

    कहां भर सकते हैं फॉर्म?

    यात्री इस फॉर्म को ऑफिशियल वीजा वेबसाइट, Su-Swagatam मोबाइल एप या अन्य सरकारी पोर्टल्स के जरिए भर सकते हैं। सबमिट करने के बाद QR कोड को सेव या प्रिंट करना जरूरी होगा।

    नियम नहीं मानने पर क्या होगा?

    अगर कोई यात्री यह फॉर्म नहीं भरता है, तो उसे भारत में एंट्री से रोका नहीं जाएगा। लेकिन इमिग्रेशन पर अतिरिक्त जांच और ज्यादा समय लग सकता है।

    क्यों लाया गया यह बदलाव?

    सरकार का कहना है कि इस डिजिटल सिस्टम से इमिग्रेशन प्रक्रिया में तेजी आएगी। शुरुआती परीक्षण में पाया गया है कि इससे 40% तक वेटिंग टाइम कम हो सकता है और यात्रियों को बेहतर अनुभव मिलेगा।

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