अंदर की बात! फेसबुक डाटा के साथ कैम्ब्रिज एनालिटिका ने भारत में क्या-क्या किया और किसे फायदा हुआ?

टेक डेस्क, अमर उजाला
Sat, 24 Mar 2018 02:52 PM IST
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Facebook Data Leaks: what Cambridge Analytica actually did in India
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    लंदन की पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म कैंब्रिज एनालिटिका द्वारा फेसबुक के डाटा से राजनीतिक पार्टियों को फायदे पहुंचाने के खुलासे के बाद से काफी बवाल मचा हुआ है। फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने माफी भी मांगी है। वहीं भारत में कांग्रेस और बीजेपी एक दूसरे पर हमलावर हैं, लेकिन सवाल यह है कि आखिर फेसबुक के 5 करोड़ यूजर्स के डाटा के साथ भारत में वाकई किसे फायदा पहुंचा और क्या-क्या? आइए जानते हैं।

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    की एक रिपोर्ट के मुताबिक कैंब्रिज एनालिटिका ने दावा किया है उसने बिहार विधानसभा चुनाव 2010 में फेसबुक डाटा का इस्तेमाल किया था और उसके क्लाइंट को चुनाव में जीत मिली थी। बता दें कि 2010 के चुनाव में जनता दल यूनाइडेट को सबसे ज्यादा सीटें मिली थीं और नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री बने थे। उस दौरान जेडीयू को 115, बीजेपी को 91, राजद को 22 और कांग्रेस को 4 सीटें हासिल हुई थीं।

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    कैम्ब्रिज एनालिटिका की पैरेंट कंपनी स्ट्रेटेजिक कम्युनिकेशंस लेबोरेटरीज (SCL) है जो कि भारत में स्ट्रेटेजिक कम्युनिकेशंस लेबोरेटरीज प्राइवेट लिमिटेड के साथ काम करती है। इस कंपनी की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक इस फर्म के चार निर्देशक हैं जिनमें अलेक्जेंडर जेम्स एशबर्नर निक, अलेक्जेंडर वाडिंगटन ओके, अमरीश कुमार त्यागी और अवनीश कुमार राय के नाम शामिल हैं। अब यहां गौर करने वाली बात यह है कि इनमें से दो ब्रिटिश नागरिक हैं और बाकी दो भारतीय हैं।

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    इनमें अमरीश त्यागी जेडीयू नेता के. सी. त्यागी के बेटे हैं। अमरीश खुद की कंपनी ओवलेनो बिजनेस इंटेलीजेंस (OBI) चलाते हैं जो कैम्ब्रिज एनालिटिका के साथ भारत में काम करती है। अब सवाल यह है कि SCL के चौथे डायरेक्टर अवनीश कुमार राय कौन हैं? दप्रिंट की रिपोर्ट की मानें तो अवनीश बिहार के रहने वाले हैं और वे इलेक्शन कंसल्टेंट के रूप में कई राजनीतिक पार्टियों के साथ काम करते हैं। खास बात यह है कि अवनीश के बारे में इंटरनेट पर बहुत ही कम जानकारी मौजूद है।

    लोकसभा चुनाव 2009 में हुआ बड़ा खेल

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    2009 में हुए लोकसभा चुनाव में अवनीश ने बीजेपी नेता महेश शर्मा के साथ काम किया था जो कि मौजूदा सरकार में संस्कृति, पर्यटन और नागरिक उड्डयन मंत्रालय में स्वतंत्र रूप से राज्य मंत्री हैं। हालांकि चुनाव में महेश शर्मा की हार हो गई थी जिसके बाद अवनीश ने SCL के इलेक्शन हेड डैन मुरेशन से संपर्क किया। इसके बाद मुरेशन ने अपने तीन साथियों के साथ भारत का दौरा किया और जेवर विधान सभा सीट का निरिक्षण किया जहां महेश शर्मा को सबसे कम वोट मिले थे। रिसर्च के बाद बीजेपी कार्यकर्ताओं की गलती सामने आई थी। इसके बाद अवनीश लंदन से आई टीम के साथ लगातार संपर्क में रहने लगे। 2010 के चुनाव से पहले मध्य प्रदेश और राजस्थान में 2003 में हुआ चुनावों में भी इन कंपनियों ने काम किए थे।

    चुनाव में कैसे फायदे पहुंचाती हैं इस प्रकार की कंपनियां?

    स्थानीय जानकारियों का बारिकी से अध्ययन

    नेता की छवी बनाने का काम

    पार्टियों के लिए सॉफ्टवेयर तैयार करना

    पार्टियों के लिए एंड्रॉयड ऐप तैयार करना ताकि रियल टाइम में सूचनाएं अपडेट हो सकें

    सोशल मीडिया के जरिए वोटर्स का मिजाज को बदलना

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