Mobile Wallet: RBI ने क्यों सख्त किए मोबाइल वॉलेट से जुड़े नियम? जानिए आम यूजर और कंपनियों पर क्या होगा असर

Nitish Kumar
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीNitish Kumar
Mon, 25 May 2026 06:12 PM IST
सार

रिजर्व बैंक (RBI) ने मोबाइल वॉलेट के नियमों को सख्त करते हुए ट्रांसफर और कैश लोडिंग की सीमाएं तय कर दी हैं। आरबीआई के मुताबिक, यह कदम सट्टेबाजी जैसी अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए उठाया गया है। इससे फिनटेक इंडस्ट्री हैरान है। आइए विस्तार से जानते हैं कि इन नए नियमों का कंपनियों और आम उपभोक्ताओं पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

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मोबाइल वॉलेट पर आरबीआई ने जारी किए नए नियम - फोटो : एआई जनरेटेड

    विस्तार

    हाल ही में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स (PPI) यानी जिन्हें हम आम भाषा में 'मोबाइल वॉलेट' कहते हैं, उनके लिए दिशा-निर्देशों को काफी सख्त कर दिया है। केंद्रीय बैंक के इस अप्रत्याशित कदम ने पूरी फिनटेक इंडस्ट्री को चौंका दिया है।

    मोबिक्विक (Mobikwik), फोनपे (PhonePe), अमेजन पे (Amazon Pay), पाइन लैब्स और एयरटेल पेमेंट्स बैंक जैसी प्रमुख कंपनियों को अब एक नए और कड़े नियमों के दायरे में काम करना होगा।

    क्या हैं वॉलेट्स के लिए नए नियम?

    आम उपभोक्ताओं और कंपनियों के लिए अब लेन-देन की सीमाएं सीमित कर दी गई हैं:

    • मासिक बैलेंस की सीमा:अब किसी भी मोबाइल वॉलेट में अधिकतम मासिक बकाया राशि 2 लाख रुपये से अधिक नहीं हो सकती।
    • फंड ट्रांसफर पर ब्रेक:व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) फंड ट्रांसफर की लिमिट अब घटाकर केवल 25,000 रुपये कर दी गई है।
    • कैश लोडिंग लिमिट:हर महीने वॉलेट में नकद जमा करने की अधिकतम सीमा 10,000 रुपये निर्धारित कर दी गई है।

    क्या UPI को मिल रहा है फायदा?

    पॉलिसी कंसेंसस सेंटर (PCC) जैसे उद्योग के प्रतिष्ठित थिंक टैंक ने इस फैसले पर गहरी चिंता जताई है। 20 मई को PCC द्वारा आयोजित एक गोलमेज बैठक में फिनटेक कंपनियों, पूर्व बैंकर्स और सलाहकारों ने हिस्सा लिया। बैठक में शामिल कई विशेषज्ञों का मानना है कि इन पाबंदियों से ऐसा प्रतीत होता है कि रणनीतिक तौर पर मोबाइल वॉलेट्स को कमजोर करके बैंकिंग सिस्टम और UPI को ज्यादा तरजीह दी जा रही है।

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    आखिर RBI ने क्यों दिखाई इतनी सख्ती?

    इस कड़े कदम के पीछे का मुख्य कारण डिजिटल वॉलेट्स का बढ़ता दुरुपयोग है। वित्त मंत्रालय की 'फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट' (FIU) ने हाल ही में कई संदिग्ध लेन-देन की पहचान की थी:

    • प्रतिबंधित सट्टेबाजी (betting), गैंबलिंग और रियल-मनी गेमिंग कंपनियां डिजिटल वॉलेट का भारी दुरुपयोग कर रही हैं।
    • कई मर्चेंट्स अपनी असली पहचान छिपाकर या गलत कैटेगरी बताकर इन अवैध ट्रांजैक्शन को अंजाम दे रहे थे।
    • FIU ने ट्रांजैक्शन की असामान्य फ्रीक्वेंसी, आय और खर्च के बीच बड़े अंतर और भारी-भरकम ट्रांसफर के बाद खातों के अचानक निष्क्रिय होने जैसे मामलों पर गहरी चिंता जताई है।

    "डेटा सार्वजनिक करे RBI" - कंपनियों की मांग

    दूसरी ओर, वॉलेट कंपनियों के अधिकारियों का तर्क है कि अगर रेगुलेटर के पास अवैध लेन-देन का ऐसा कोई ठोस डेटा है, तो उसे इंडस्ट्री के साथ साझा या सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

    • कंपनियों का कहना है कि चंद गलत लोगों को सजा देने के बजाय पूरी इंडस्ट्री पर प्रतिबंध लगाना दुर्भाग्यपूर्ण है और इससे किसी का भला नहीं होगा।
    • कंपनियों ने फुल-KYC और मर्चेंट ऑनबोर्डिंग के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने में सैकड़ों करोड़ रुपये का निवेश किया है। एक सीईओ के मुताबिक, नई पाबंदियों के कारण वॉलेट बिजनेस कभी मुनाफे में नहीं आ पाएगा और कंपनियां वित्तीय समावेशन वाले नए उत्पादों में निवेश करने से डरेंगी।
    • इंडस्ट्री का यह भी दावा है कि सट्टेबाजी और गैरकानूनी लेन-देन केवल वॉलेट से नहीं, बल्कि UPI और लीगल बैंकिंग चैनलों के जरिए भी धड़ल्ले से हो रहे हैं।

    ग्राहकों और इंडस्ट्री पर क्या पड़ेगा असर?

    20 मई की बैठक में जानकारों ने इस बात पर जोर दिया कि मोबाइल वॉलेट का बिजनेस मॉडल बैंकों और UPI से काफी अलग होता है। नए नियमों से प्रीपेड इंस्ट्रूमेंट्स का संचालन महंगा और मुश्किल हो जाएगा, जिससे ग्राहकों का मोहभंग हो सकता है।

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    विशेषज्ञों का मानना है कि नए नियमों का असर सीधे वॉलेट यूजर्स और फिनटेक इंडस्ट्री दोनों पर पड़ सकता है। एक तरफ RBI फाइनेंशियल फ्रॉड और अवैध ट्रांजेक्शन को रोकना चाहता है। वहीं दूसरी तरफ कंपनियों को डर है कि इससे डिजिटल पेमेंट इनोवेशन और वित्तीय समावेशन की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।

    अब यह देखना अहम होगा कि आरबीआई इंडस्ट्री के सुझावों के आधार पर इन प्रतिबंधों में आगे कोई बदलाव करता है या नहीं।

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