Research: फिट रहने के लिए पहनते हैं SmartWatch तो दूर कर लें सारे भ्रम, ये रिसर्च जानकर उठ जाएगा भरोसा

नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीनीतीश कुमार
Tue, 28 Jan 2025 06:33 PM IST
सार

नॉर्ट्रे डैम यूनिवर्सिटी ने अपनी स्टडी में 15 ब्राडंस के स्मार्टवॉच को केमिकल पाए जाने के वजह से कैंसर कारक घोषित किया है। दरअसल, इन स्मार्टवच के रबर बैंड में कैंसर पैदा करने वाले कैमिकल होने का दावा किया गया है।

Smartwatch Bands Contains Cancer Causing Chemicals Reveals Study Report Of Notre Dame University
स्मार्टवॉच से कैंसर का खतरा - फोटो : अमर उजाला

    विस्तार

    अगर स्मार्टवॉच पहनने से अपकी हेल्थ सुधर रही है, तो अब ये सोच बदल लीजिए। दरअसल, ऐसा हम नहीं कह रहे, बल्कि एक रिसर्च में खुद ये सच्चाई सामने आई है। बीते दिनों अमेरिका की नॉर्ट्रे डैम यूनिवर्सिटी ने मार्केट में बिकने वाले 22 पॉपुलर स्मार्टवॉच ब्रांड्स के प्रोडक्ट्स पर स्टडी की जिसमें से 15 स्मार्टवॉच में कैंसर पैदा करने वाले हानिकारक कैमिकल्स पाए गाए। रिसर्च में इन कैमिकल्स को "फॉरेवर कैमिकल्स" नाम दिया गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि ये केमिकल्स पर्यावरण में कई सालों तक रहते हैं और काफी मुश्किल से विघटित होते हैं।

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    Smartwatch - फोटो : FREEPIK

    15 ब्रांड्स के स्मार्टवॉच में मिले कैमिकल

    नॉर्ट्रे डैम यूनिवर्सिटी ने अपनी स्टडी में 15 ब्राडंस के स्मार्टवॉच को केमिकल पाए जाने के वजह से कैंसर कारक घोषित किया है। दरअसल, इन स्मार्टवच के रबर बैंड को बनाने में फ़्लोरोएलास्टोमर रबर का इस्तेमाल किया जाता है, जो एक प्रकार का सिंथेटिक रबर है और यह तेल, पसीने जैसे तरल पदार्थों का प्रतिरोधक होता है। वैज्ञानिकों ने पाया कि रबर बैंड में इस्तेमाल होने वाला फ़्लोरोएलास्टोमर कंपाउंड कैंसर पैदा कर सकता है। रबर बैंड में इसका घनत्व 1% से भी कम होता है, लेकिन इतनी ही मात्रा एक साधारण व्यक्ति में कैंसर पैदा करने के लिए काफी होता है।

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    Smartwatch - फोटो : FREEPIK

    बैन लगाने की उठ चुकी है मांग

    रिसर्च में पाया गया कि स्मार्टवॉच के रबर बैंड को बनाने में 40 प्रतिशत तक कैमिकल का इस्तेमाल होता है। इसे बनाने में ऐसे केमिकल्स को उपयोग में लाया जाता है जो कार्पेट, पेपर और कीड़े मारने वाली दवाइयों में भी पाए जाते हैं। इन केमिकल्स से लिवर की बीमारी होने का खतरा रहता है। इतना ही नहीं, यूरोपियन यूनियन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फ़्लोरोएलास्टोमर कंपाउंड से बनाए जाने वाले कन्ज्यूमर प्रोडक्ट्स पर बैन लगाने की मांग की है। इस रिसर्च से हुए खुलासों को इकोटॉक्सिकोलॉजी एंड एनवायरनमेंटल सेफ्टी जर्नल में प्रकाशित किया गया है।

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