GPS लगाकर उड़ाई जा रही कारें: चोरी का हाई-टेक तरीका देख हिल जाएगा दिमाग, कार खरीदने वाले हो जाएं सावधान
GPS Tracker Car Thief Gang Busted:
नोएडा पुलिस ने कार चोरी करवाने वाले एक शातिर गिरोह का पर्दाफाश किया है। GPS तकनीक का फायदा उठाकर गिरोह के लोग किस तरह कार चोरी करते थे, यह जाकर आप चौंक जाएंगे। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला।

विस्तार
तकनीक ने एक ओर जहां हमें सभी तरह की सुख-सुविधाएं दी हैं, वहीं दूसरी ओर इसने हमारे सामने कई नई परेशानियां भी खड़ी कर दी हैं। GPS की मदद से कार चोरी करने का ये मामला कोई नया नहीं है, लेकिन यह वारदात आपके लिए एक सबक है कि सकेंड हैंड कार खरीदते समय आपको किन-किन बातों से सावधान रहना चाहिए।
दरअसल, नोएडा पुलिस ने कार चोरी करने वाले एक ऐसे शातिर गिरोह का पर्दाफाश किया है जो लोगों को सकेंड हैंड कार बेचने के बाद उसे चोरी कर लेता था। चोरी को अंजाम देने के लिए रेकी नहीं, बल्कि GPS तकनीक की भरपूर मदद ली जाती थी।
जीपीएस ट्रैकर लगाकर करते थे ट्रैकिंग
ये गिरोह बैंक द्वारा जब्त की गई कारों को सस्ते दाम में खरीदता था। गिरोह के सदस्य इन कारों को ग्राहकों को बेचने से पहले उनकी डुपलिकेट चाबी बनवा लेते थे। सिर्फ चाबी ही नहीं बल्कि कार की ट्रैकिंग करने के लिए उसमें जीपीएस भी फिट कर देते थे। ग्राहक को इस बात की भनक तक नहीं लगती थी कि कार में जीपीएस लगा है और उसकी कार ट्रैक हो रही है। GPS ट्रैकर अपराधियों के फोन से कनेक्ट होता था, जिसमें उन्हें कार की रियल टाइन लोकेशन मिलती रहती थी। GPS लोकेशन के जरिए अपराधी कार तक पहुंच जाते थे और डुपलिकेट चाबी से कार को अनलॉक करने के बाद लेकर फरार हो जाते थे।
इनके पास से एक ग्रे रंग की टाटा नेक्सन कार बरामद की गई है जिसे हाल ही में बेचा गया था। कार चोरी होने के बाद कार के मालिक ने इसकी शिकायत पुलिस से की थी। पुलिस ने टीम ने गिरोह के तीनों को गिरफ्तार किया है। इससे पहले भी ये इस तरह से कार बेचकर उसकी चोरी करवा चुके है।
कैसे पता करें कार में जीपीएस फिट है या नहीं?
अगर आप सकेंड हैंड कार खरीद रहे हैं तो ऐसी घटना आपके साथ भी हो सकती हैं। डीलर से सकेंड हैंड कार खरीदने पर कार की कंडिशन के साथ-साथ उसमें ट्रैकर की जांच भी जरूर करें। हो सकता है कि कार में ट्रैकर लगा हो और आपको पता भी न चले।कार में अक्सर डैशबोर्ड के नीचे या OBD II पोर्ट के पास ट्रैकर लगाया जाता है, जो आमतौर पर स्टीयरिंग व्हील के नीचे होता है। यहां कोई बाहरी डिवाइस तो नहीं लगा, इसकी जांच करें।पोर्टेबल मैग्नेटिक ट्रैकर अक्सर आगे या पीछे की सीटों के नीचे चिपका दिए जाते हैं।डैशबोर्ड के अंदरूनी हिस्सों और स्टोरेज बॉक्स की गहराई में हाथ डालकर चेक करें।कई बार अपराधी कार के बाहरी बंपर के निचले हिस्से में भी ट्रैकर लगा देते हैं। यहां भी चेकिंग जरूरी है।
- Tips: फोन में चिल्लाते रहते हैं हैलो-हैलो, फिर भी सामने वाले तक नहीं पहुंचती आवाज, कहीं ये दिक्कत तो नहीं?
- Instagram: एआई जनरेटेड वीडियो से परेशान हुए इंस्टाग्राम हेड, कहा- लोग शक की निगाहों से देखेंगे कंटेंट
- Grok Controversy: बार-बार विवादों में क्यों फंस रहा ग्रोक, जानिए ChatGPT-Gemini से कैसे अलग है ये एआई टूल
- TV की दुनिया में नई क्रांति: क्या है Micro RGB तकनीक जिसे Samsung और LG लेकर आ रहे हैं? जानें सब कुछ