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Ganesh Chaturthi 2026: कब है गणेश चतुर्थी, जानिए गणपति स्थापना शुभ मुहूर्त, पूजा-विधि और महत्व
Thu, 20 Aug 2026 05:59 PM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Thu, 20 Aug 2026 05:59 PM IST
Ganesh Chaturthi 2026: 14 सितंबर से गणेशोत्सव का पर्व शुरू होने वाला है। यह पर्व 10 दिनों तक चलता है जिसमें घर-घर गणपति देव विराजमान होते हैं।
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Ganesh Chaturthi 2026
- फोटो : AI
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विस्तार
Ganesh Chaturthi 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाता है। भाद्रपद की चतुर्थी तिथि पर घर-घर भगवान गणेश विराजित होते हैं। गणेश उत्सव का पर्व 10 दिनों तक चलता है। इस दिन विधि-विधान के साथ भगवान गणेश की पूजा-अर्चना होती है और अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान गणपति का विसर्जन होता है। आइए जानते हैं इस बार गणपति स्थापना और पूजा के लिए शुभ मुहूर्त।
गणेश चतुर्थी 2026 तिथि
इस वर्ष गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026 को है। हिंदू पंचांग के अनुसार चतुर्थी तिथि 14 सितंबर को सुबह 7 बजकर 06 मिनट से शुरू होगी जो 15 सितंबर को सुबह 7 बजकर 44 मिनट पर खत्म होगी। उदया तिथि के आधार पर गणेश चतुर्थी तिथि 14 सितंबर को मनाई जाएगी।
गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त 2026
भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देवता माना जाता है और गणेश चतुर्थी पर गणपति की स्थापना और पूजा के लिए दोपहर काल का समय बहुत ही शुभ माना जाता है। पंचांग के अनुसार 14 सितंबर को गणेश पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 02 मिनट से लेकर दोपहर 01 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। इस दौरान भगवान गणेश की विधि-विधान के साथ पूजा होती है।
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कैसे करें गणपति स्थापना ?
सबसे पहले गणपति स्थापना के स्थान की साफ-सफाई करें, फिर चौकी पर साफ कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश की प्रतिमा को स्थापित करें। पूजा का संकल्प लेते हुए भगवान गणेश का ध्यान करें और उन्हें आचमन और पूजा सामग्री अर्पित करें। इसके बाद भगवान गणेश को रोली, अक्षत, सिंदूर, फल, फूल और दूर्वा अर्पित करें। पूजा का दौरान ऊं गं गणपतये नम: का जाप करें, फिर आरती और कथा सुनें।
भगवान गणेश को दूर्वा घास बहुत ही प्रिय होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गणेश जी की पूजा में दूर्वा की गांठें बनाकर भगवान गणेश को अर्पित करना शुभ होता है। इसके अलावा भगवान गणेश को मोदक भी काफी प्रिय होता है जिसे जरूर अर्पित करना चाहिए।
गणेश चतुर्थी पर क्यों है चंद्रमा देखना वर्जित
भाद्रपद माह की चतुर्थी पर चंद्र दर्शन करना वर्जित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन चंद्रमा के दर्शन करने से झूठा कलंक लगता है। इससे भगवान कृष्ण से जुड़ी कथा प्रचलित है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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गणेश चतुर्थी 2026 तिथि
इस वर्ष गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026 को है। हिंदू पंचांग के अनुसार चतुर्थी तिथि 14 सितंबर को सुबह 7 बजकर 06 मिनट से शुरू होगी जो 15 सितंबर को सुबह 7 बजकर 44 मिनट पर खत्म होगी। उदया तिथि के आधार पर गणेश चतुर्थी तिथि 14 सितंबर को मनाई जाएगी।
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गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त 2026
भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देवता माना जाता है और गणेश चतुर्थी पर गणपति की स्थापना और पूजा के लिए दोपहर काल का समय बहुत ही शुभ माना जाता है। पंचांग के अनुसार 14 सितंबर को गणेश पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 02 मिनट से लेकर दोपहर 01 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। इस दौरान भगवान गणेश की विधि-विधान के साथ पूजा होती है।
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कैसे करें गणपति स्थापना ?
सबसे पहले गणपति स्थापना के स्थान की साफ-सफाई करें, फिर चौकी पर साफ कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश की प्रतिमा को स्थापित करें। पूजा का संकल्प लेते हुए भगवान गणेश का ध्यान करें और उन्हें आचमन और पूजा सामग्री अर्पित करें। इसके बाद भगवान गणेश को रोली, अक्षत, सिंदूर, फल, फूल और दूर्वा अर्पित करें। पूजा का दौरान ऊं गं गणपतये नम: का जाप करें, फिर आरती और कथा सुनें।
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गणेश जी को अर्पित करें दूर्वाभगवान गणेश को दूर्वा घास बहुत ही प्रिय होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गणेश जी की पूजा में दूर्वा की गांठें बनाकर भगवान गणेश को अर्पित करना शुभ होता है। इसके अलावा भगवान गणेश को मोदक भी काफी प्रिय होता है जिसे जरूर अर्पित करना चाहिए।
गणेश चतुर्थी पर क्यों है चंद्रमा देखना वर्जित
भाद्रपद माह की चतुर्थी पर चंद्र दर्शन करना वर्जित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन चंद्रमा के दर्शन करने से झूठा कलंक लगता है। इससे भगवान कृष्ण से जुड़ी कथा प्रचलित है।
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।