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शिमला: हाईकोर्ट ने कहा- वन भूमि पर अतिक्रमण और निर्माण में अफसरों की मिलीभगत से इन्कार नहीं

Fri, 21 Aug 2026 05:00 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Fri, 21 Aug 2026 05:00 AM IST
सार
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 हाईकोर्ट ने शिमला के बालूगंज और चक्कर क्षेत्र के बीच हरे-भरे क्षेत्र ( ग्रीन बेल्ट) में बन रही पांच से छह मंजिला दो बड़ी इमारतों, अवैध सड़क निर्माण और वन भूमि पर मलबे की डंपिंग के मामले में कड़ा संज्ञान लिया है। 

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Shimla: High Court states that officer collusion in encroachment and construction on forest land cannot be rul
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शिमला के बालूगंज और चक्कर क्षेत्र के बीच हरे-भरे क्षेत्र ( ग्रीन बेल्ट) में बन रही पांच से छह मंजिला दो बड़ी इमारतों, अवैध सड़क निर्माण और वन भूमि पर मलबे की डंपिंग के मामले में कड़ा संज्ञान लिया है। राज्य सरकार और संबंधित विभागों को नोटिस जारी किया है। टिप्पणी करते हुए कहा कि शिमला के एक व्यवसायी की ओर से पेड़ों को काटकर और वन भूमि पर कथित तौर पर अतिक्रमण कर किए जा रहे इस बड़े निर्माण में वन विभाग के अधिकारियों की संलिप्तता या मिलीभगत से इन्कार नहीं किया जा सकता।

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मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने मामले में तत्काल हस्तक्षेप करते हुए जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण के सचिव को वन विभाग के आला अधिकारियों और नगर निगम शिमला के कमिश्नर के साथ मिलकर विवादित स्थल का संयुक्त निरीक्षण करने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही अपनी विस्तृत रिपोर्ट में यह स्पष्ट करें कि क्या इस पांच और छह मंजिला इमारत और सड़क के निर्माण के लिए नगर निगम से कोई वैध मंजूरी ली गई थी या नहीं। यह भी जांच की जाए कि जमीन की मूल प्रकृति क्या है और क्या यह वन भूमि का हिस्सा है। अदालत ने निर्देश दिया कि यदि निरीक्षण के दौरान निर्माण से जुड़ी आवश्यक मंजूरियां और स्वीकृतियां नहीं पाई जाती हैं, तो तुरंत प्रभाव से सारा निर्माण कार्य रोकने के आदेश जारी किए जाएं।अगली सुनवाई 14 सितंबर को होगी।

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याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को सौंपे गए दस्तावेजों और गूगल मैप्स के तुलनात्मक रिकॉर्ड से खुलासा हुआ कि वर्ष 2015 से 2019 के दौरान यह पूरा इलाका पूरी तरह से एक ग्रीन बेल्ट (हरियाली क्षेत्र) था। वर्ष 2025 के गूगल मैप और हालिया तस्वीरों में यहां दो बड़ी-बड़ी इमारतों का ढांचा खड़ा दिखाई दे रहा है। कोर्ट में पेश की गई तस्वीरों से साफ हुआ है कि लोअर चक्कर-टूटू रोड से इस निर्माण स्थल तक एक अवैध सड़क का निर्माण किया गया है। इस प्रक्रिया में कई हरे पेड़ों को बेरहमी से काटा गया और बड़े पैमाने पर जंगलों में मलबे की डंपिंग की गई। इस मलबे का एक बड़ा हिस्सा ऐतिहासिक कार्ट रोड तक पहुंच गया है। अदालत ने चिंता जताते हुए कहा कि जिस तरह सड़क पर पेड़ों को असुरक्षित छोड़ दिया गया है, वे आने वाले समय में सबसे पहले जमींदोज होंगे।

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