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रेरा की बड़ी राहत: अटके रियल एस्टेट प्रोजेक्टों को चार महीने की अतिरिक्त मोहलत, खरीदारों पर क्या होगा असर?

Sun, 30 Aug 2026 10:44 AM IST
Ankesh Dogra विश्वास भारद्वाज, शिमला।
विश्वास भारद्वाज, शिमला। Published by: Ankesh Dogra Updated Sun, 30 Aug 2026 10:44 AM IST
सार
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हिमाचल प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी ने पात्र पंजीकृत रियल एस्टेट प्रोजेक्टों की पूर्णता अवधि चार महीने बढ़ाने का फैसला लिया है। पश्चिम एशिया में युद्ध और वैश्विक सप्लाई चेन में व्यवधान के कारण निर्माण सामग्री की उपलब्धता प्रभावित होने को इसकी वजह बताया गया है। यह राहत स्वतः मिलेगी और कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा। हालांकि पुराने बिल्डर डिफॉल्ट माफ नहीं होंगे और खरीदारों के वैधानिक अधिकार सुरक्षित रहेंगे।

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himachal rera four month extension real estate projects builders
रेरा (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (एचपी रेरा) ने राज्य के पंजीकृत रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स को पूरा करने की समयसीमा में चार महीने का अतिरिक्त समय दिया है। अथॉरिटी ने यह फैसला पश्चिम एशिया में युद्ध की स्थिति के कारण वैश्विक सप्लाई चेन में आए व्यवधान और निर्माण सामग्री की उपलब्धता में देरी को देखते हुए लिया है। रेरा की ओर से जारी यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। 
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यह विस्तार उन सभी पंजीकृत रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स को मिलेगा, जिनकी मूल, संशोधित या पहले से बढ़ाई गई पूर्णता तिथि 28 फरवरी 2026 या उसके बाद आती है। इसका मतलब है कि ऐसे प्रोजेक्ट्स की निर्धारित पूर्णता अवधि चार महीने आगे बढ़ जाएगी। हालांकि, एक अगस्त 2026 या उसके बाद रजिस्टर्ड होने वाले नए प्रोजेक्ट्स इस विशेष राहत के दायरे में नहीं आएंगे। 
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इस विस्तार का लाभ लेने के लिए प्रमोटरों को एचपी रेरा के समक्ष अलग से आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी। चार महीने की राहत स्वतः लागू होगी। इसके लिए कोई अतिरिक्त शुल्क भी नहीं लिया जाएगा। रेरा का संबंधित रजिस्ट्रेशन और आईटी सेल अथॉरिटी के रिकॉर्ड तथा आधिकारिक पोर्टल पर पात्र प्रोजेक्ट्स की पूर्णता अवधि में आवश्यक बदलाव करेगा।
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रेरा ने यह भी स्पष्ट किया है कि फोर्स मेजर की स्थिति शुरू होने से पहले प्रमोटर की ओर से किए गए किसी उल्लंघन, गलत बयानी या लापरवाही को इस आदेश के तहत माफ नहीं किया जाएगा। यानी चार महीने का विस्तार पुराने डिफॉल्ट को नियमित करने या उससे राहत देने का आधार नहीं बनेगा। चार महीने की राहत से खरीदारों के ब्याज, रिफंड और मुआवजे के वैधानिक अधिकार प्रभावित नहीं होंगे। विवाद की स्थिति में रेरा फोर्स मेजर के वास्तविक प्रभाव और मामले के तथ्यों की जांच के बाद फैसला करेगा।

खरीदारों पर बढ़ सकता है आर्थिक दबाव
रेरा की ओर से प्रोजेक्ट्स को चार महीने की अतिरिक्त मोहलत मिलने का सीधा असर खरीदारों पर पड़ सकता है। पजेशन (कब्जा) की तारीख आगे बढ़ने से खरीदारों को अपने घर या प्लॉट के लिए अतिरिक्त इंतजार करना होगा। जिन लोगों ने होम लोन लिया है, उनके लिए देरी आर्थिक बोझ बढ़ा सकती है। उन्हें पजेशन मिलने तक एक तरफ होम लोन की ईएमआई और दूसरी तरफ मौजूदा मकान का किराया चुकाना पड़ सकता है। वहीं, फोर्स मेजर की वैध अवधि में हुई देरी के लिए खरीदार बिल्डर से सामान्य तौर पर देरी का मासिक हर्जाना या पेनल्टी ब्याज नहीं मांग सकेंगे। हालांकि, अन्य वैधानिक अधिकार सुरक्षित रहेंगे।
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