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हिमाचल में लंपी का कहर: 2,500 पशु चपेट में, 90 की मौत; सिरमौर-ऊना में सबसे ज्यादा मामले, जानें कैसे करें बचाव
Sun, 06 Sep 2026 11:03 AM IST
Ankesh Dogra
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Sun, 06 Sep 2026 11:03 AM IST
हिमाचल में लंपी बीमारी का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। करीब 2,500 पशु संक्रमित और 90 की मौत हो चुकी है। सिरमौर और ऊना सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। पशुपालन विभाग ने संक्रमण रोकने के लिए युद्ध स्तर पर टीकाकरण अभियान शुरू किया है। पढ़ें पूरी खबर...
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : सांकेतिक तस्वीर।
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विस्तार
हिमाचल प्रदेश में पशुओं में लंपी रोग का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। प्रदेश में अब तक करीब 2,500 पशु लंपी वायरस की चपेट में आ चुके हैं, जबकि 90 पशुओं की मौत हो चुकी है। बीमारी का सबसे ज्यादा असर सिरमौर और ऊना जिले में देखने को मिल रहा है। इसके अलावा सोलन, बिलासपुर, हमीरपुर और मंडी में भी संक्रमण के मामले सामने आए हैं।
बढ़ते संक्रमण को देखते हुए पशुपालन विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है। बीमारी को नियंत्रित करने के लिए युद्ध स्तर पर टीकाकरण अभियान शुरू किया गया है। विभाग की टीमें गांव-गांव पहुंचकर पशुओं का टीकाकरण कर रही हैं। अब तक प्रदेश में 10,382 पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है।
विभाग के अनुसार जर्सी गाय, बैल और बछड़ों में लंपी का असर ज्यादा देखा जा रहा है। इसके मुकाबले स्थानीय और देसी नस्ल के पशुओं में संक्रमण के मामले अपेक्षाकृत कम हैं। पशुपालकों को सलाह दी गई है कि पशु के शरीर पर गांठें, बुखार या बीमारी के अन्य लक्षण दिखाई देने पर उसे नजरअंदाज न करें और तत्काल पशु चिकित्सक से संपर्क करें।
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बीमारी की पुष्टि के लिए संदिग्ध पशुओं के नमूने राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान, भोपाल भेजे जा रहे हैं। विभाग की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में संक्रमित पशुओं की निगरानी और उपचार कर रही हैं। साथ ही संक्रमित पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखने और पशुशालाओं में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी गई है।
सिरमौर में 2,064 गोवंश संक्रमित
प्रदेश में लंपी का सबसे ज्यादा असर सिरमौर जिले में है। यहां अब तक 2,064 गोवंश संक्रमित पाए गए हैं, जबकि 47 पशुओं की मौत हो चुकी है। ऊना में 438 पशु संक्रमित हुए हैं और इनमें से 257 स्वस्थ हो चुके हैं। जिले में अब तक 21 पशुओं की मौत हुई है।
बिलासपुर में 169 पशु संक्रमित पाए गए हैं। इनमें से 94 पशु उपचार के बाद स्वस्थ हो चुके हैं, जबकि आठ की मौत हुई है। मंडी में 55 पशु संक्रमित मिले हैं और एक पशु की मौत हुई है। चंबा में अब तक तीन पशुओं की मौत की सूचना है।
पशुपालकों से टीकाकरण अभियान में सहयोग करने और अपने पशुओं का समय पर टीकाकरण करवाने की अपील की है। बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर स्वयं उपचार करने के बजाय पशु चिकित्सक से संपर्क करें।- डॉ. संजीव कुमार धीमान, निदेशक, पशुपालन विभाग
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बढ़ते संक्रमण को देखते हुए पशुपालन विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है। बीमारी को नियंत्रित करने के लिए युद्ध स्तर पर टीकाकरण अभियान शुरू किया गया है। विभाग की टीमें गांव-गांव पहुंचकर पशुओं का टीकाकरण कर रही हैं। अब तक प्रदेश में 10,382 पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है।
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विभाग के अनुसार जर्सी गाय, बैल और बछड़ों में लंपी का असर ज्यादा देखा जा रहा है। इसके मुकाबले स्थानीय और देसी नस्ल के पशुओं में संक्रमण के मामले अपेक्षाकृत कम हैं। पशुपालकों को सलाह दी गई है कि पशु के शरीर पर गांठें, बुखार या बीमारी के अन्य लक्षण दिखाई देने पर उसे नजरअंदाज न करें और तत्काल पशु चिकित्सक से संपर्क करें।
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बीमारी की पुष्टि के लिए संदिग्ध पशुओं के नमूने राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान, भोपाल भेजे जा रहे हैं। विभाग की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में संक्रमित पशुओं की निगरानी और उपचार कर रही हैं। साथ ही संक्रमित पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखने और पशुशालाओं में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी गई है।
सिरमौर में 2,064 गोवंश संक्रमित
प्रदेश में लंपी का सबसे ज्यादा असर सिरमौर जिले में है। यहां अब तक 2,064 गोवंश संक्रमित पाए गए हैं, जबकि 47 पशुओं की मौत हो चुकी है। ऊना में 438 पशु संक्रमित हुए हैं और इनमें से 257 स्वस्थ हो चुके हैं। जिले में अब तक 21 पशुओं की मौत हुई है।
बिलासपुर में 169 पशु संक्रमित पाए गए हैं। इनमें से 94 पशु उपचार के बाद स्वस्थ हो चुके हैं, जबकि आठ की मौत हुई है। मंडी में 55 पशु संक्रमित मिले हैं और एक पशु की मौत हुई है। चंबा में अब तक तीन पशुओं की मौत की सूचना है।
पशुपालकों से टीकाकरण अभियान में सहयोग करने और अपने पशुओं का समय पर टीकाकरण करवाने की अपील की है। बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर स्वयं उपचार करने के बजाय पशु चिकित्सक से संपर्क करें।- डॉ. संजीव कुमार धीमान, निदेशक, पशुपालन विभाग
जिलेवार क्या है स्थिति?
| जिला | संक्रमित पशु | स्वस्थ | मौत |
|---|---|---|---|
| सिरमौर | 2,064 | — | 47 |
| ऊना | 438 | 257 | 21 |
| बिलासपुर | 169 | 94 | 8 |
| मंडी | 55 | — | 1 |
| चंबा | — | — | 3 |
क्या है लंपी रोग
लंपी एक संक्रामक वायरल बीमारी है, जिसमें संक्रमित पशु की चमड़ी के नीचे गांठें बनने लगती हैं। इसके साथ बुखार और कमजोरी जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। बीमारी बढ़ने पर पशु की हालत गंभीर हो सकती है। समय पर पहचान और उपचार के साथ संक्रमण को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
लंपी एक संक्रामक वायरल बीमारी है, जिसमें संक्रमित पशु की चमड़ी के नीचे गांठें बनने लगती हैं। इसके साथ बुखार और कमजोरी जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। बीमारी बढ़ने पर पशु की हालत गंभीर हो सकती है। समय पर पहचान और उपचार के साथ संक्रमण को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
बीमारी से बचाव के लिए क्या करें?
-
पशु में गांठ या बुखार दिखने पर तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें।
-
संक्रमित पशु को स्वस्थ पशुओं से अलग रखें।
-
पशुशाला में साफ-सफाई रखें।
-
विभाग के टीकाकरण अभियान में सहयोग करें।
-
बीमार पशु का स्वयं उपचार करने से बचें।
-
संदिग्ध पशु को दूसरे पशुओं के संपर्क में आने से रोकें।