Bad Network: ट्रेन में बार-बार क्यों 'रुलाता' है इंटरनेट? जानिए दौड़ती रेलगाड़ी में क्यों उड़ जाता है नेटवर्क

Nitish Kumar
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीNitish Kumar
Thu, 25 Jun 2026 05:12 PM IST
सार

Bad Network In Train:

ट्रेन का सफर भले ही आरामदायक हो, लेकिन बफरिंग करता इंटरनेट और बार-बार कटने वाली कॉल्स अक्सर मजा किरकिरा कर देती हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि प्लेटफॉर्म पर तो ठीक, लेकिन ट्रेन के अंदर नेटवर्क अचानक क्यों गायब हो जाता है? यह सिर्फ टावर की कमी नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक दिलचस्प विज्ञान और तकनीकी बाधाएं हैं। आइए समझते हैं इस समस्या की असली वजह।

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जानिए ट्रेन में क्यों चला जाता है नेटवर्क - फोटो : ANI

    अगर आप अक्सर ट्रेन से सफर करते हैं, तो आपने एक बात जरूर नोटिस की होगी। जैसे ही ट्रेन रफ्तार पकड़ती है, आपके स्मार्टफोन का नेटवर्क लुका-छिपी खेलने लगता है। जरूरी कॉल बीच में कट जाती है, यूट्यूब वीडियो बफर होने लगता है और व्हाट्सएप मैसेज भेजने के लिए भी मशक्कत करनी पड़ती है।

    ज्यादातर लोगों को लगता है कि ऐसा सिर्फ खराब टेलीकॉम सर्विस या टावर न होने की वजह से होता है। हालांकि, सच्चाई इससे कहीं अधिक तकनीकी है। आइए जानते हैं ट्रेन के सफर में अक्सर मोबाइल नेटवर्क की इतनी समस्या आखिर क्यों होती है।

    लोहे का डिब्बा रोकता है सिग्नल
    लोहे का डिब्बा रोकता है सिग्नल - फोटो : Adobe stock

    1. लोहे का डिब्बा रोकता है सिग्नल

    ट्रेन में नेटवर्क न आने का सबसे बड़ा कारण खुद ट्रेन का डिब्बा है। ट्रेन के डिब्बे (कोच) भारी एल्यूमीनियम और स्टील जैसी धातुओं से बने होते हैं। विज्ञान के अनुसार, जब कोई जगह पूरी तरह से धातु से घिरी होती है, तो वह इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स को अंदर आने से रोकती है। इसके अलावा, एसी (AC) कोच में लगे मोटे और टिंटेड शीशे भी सिग्नल्स को कमजोर कर देते हैं। यही वजह है कि ट्रेन के दरवाजे या खिड़की के पास जाने पर अचानक नेटवर्क बेहतर हो जाता है।

    सेल्युलर हैंडओवर में देरी
    सेल्युलर हैंडओवर में देरी - फोटो : AI

    2. सेल्युलर हैंडओवर में देरी

    आपका मोबाइल फोन लगातार नजदीकी सेल टावर से सिग्नल कैच करता है। जब आप एक जगह स्थिर होते हैं, तो कनेक्शन मजबूत रहता है। लेकिन जब ट्रेन 80 से 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ती है, तो आपका फोन बहुत तेजी से एक टावर की रेंज से निकलकर दूसरे टावर की रेंज में प्रवेश करता है। इस प्रक्रिया को 'हैंडओवर' कहते हैं। जब यह हैंडओवर ट्रेन की गति के साथ तालमेल नहीं बिठा पाता या नया टावर सिग्नल देने में एक सेकंड की भी देरी करता है, तो आपकी कॉल ड्रॉप हो जाती है या इंटरनेट रुक जाता है।

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