Smart Watch: कलाई की घड़ी कैसे पढ़ लेती है दिल की धड़कन, कैसे काउंट करती है स्टेप्स, जानिए पूरा विज्ञान
How Smart Watch Works:
स्मार्टवॉच और स्मार्ट रिंग जैसी डिवाइस आज न सिर्फ समय बताती हैं बल्कि आपके हेल्थ से जुड़ी कई अहम जानकारियां भी देती हैं। जानिए, ये गैजेट्स आपके स्वास्थ्य का पता लगाने के लिए आखिर किस तकनीक पर काम करती हैं।

आजकल घड़ियों का काम केवल समय दिखाना ही नहीं, बल्कि आपके स्वास्थ्य से जुड़ी अहम जानकारियां भी देना है। आज के समय में स्मार्टवॉच और फिटनेस बैंड में हार्ट ट्रैकिंग फीचर मिलना आम हो गया है। यही नहीं, अब तो स्मार्ट रिंग और यहां तक कि कुछ एयरपॉड्स में भी यह सुविधा शामिल होने लगी है। कहा जाता है कि हार्ट रेट से दिल के स्वास्थ्य की सही जानकारी मिल सकती है। अगर धड़कनें सामान्य हैं तो समझिए दिल अच्छी तरह से ब्लड पंप कर रहा है और शरीर के सभी अंगों तक ऑक्सीजन पहुंच रही है। लेकिन सवाल उठता है कि आखिर ये डिवाइस धड़कनें गिनती कैसे हैं? आइए जानते हैं...

चलता फिरता हेल्थ डिवाइस
दरअसल, स्मार्टवॉच कोई साधारण घड़ी नहीं बल्कि चलता फिरता हेल्थ डिवाइस होता है। इसमें ब्लड प्रेशर, हार्ट रेट और एक्टिविटी ट्रैक करने के लिए कई तरह के सेंसर लगाए जाते हैं। आपने अक्सर स्मार्टवॉच के नीचे की तरफ हरी रोशनी झिलमिलाते देखी होगी। यही ग्रीन लाइट और उसके साथ लगा ऑप्टिकल सेंसर, हार्ट रेट मापने का काम करता है। दरअसल, लाल और हरा रंग कलर व्हील पर एक-दूसरे के विपरीत होते हैं। खून ग्रीन लाइट को आसानी से सोख लेता है। जब रोशनी खून से टकराकर वापस लौटती है, तो ऑप्टिकल सेंसर उसे पकड़ लेता है और वहीं से धड़कनें मापी जाती हैं।

हार्टबीट रिकॉर्ड करता है सेंसर
इस प्रोसेस को फोटोप्लेथिस्मोग्राफी (PSP) कहते हैं। हर बार दिल धड़कने पर हार्ट मसल सिकुड़ती है और नसों में खून की मात्रा बढ़ जाती है। मसल्स के रिलैक्स होने पर खून कम हो जाता है। जब नसें फूलती हैं तो वे ज्यादा ग्रीन लाइट अब्जॉर्ब करती हैं और रिलैक्स होने पर कम। यही पैटर्न सॉफ्टवेयर को हार्ट रेट को गिनने में मदद करता है और आपको वॉच पर रियल-टाइम डेटा दिखाई देता है।