पापा जी, हमें छोड़कर मत जाओ, मम्मी की बात मान लो.... गांव चचियां श्मशानघाट (हिमाचल प्रदेश, पालमपुर) पर शहीद संजय की बड़ी बेटी अमिषा के रुदन से मौजूद हर व्यक्ति की आंख नम हो गई।
वह बोलीं- कुछ नहीं होगा मेरे पापा के बलिदान का, उनकी फाइल भी जल्द ही कागजों में बंद हो जाएगी। अमिषा ने एसपी गांधी से लिपटते हुए कहा- अंकल.. शहीदों का इस देश में क्या होगा। जवान शहीद होते रहेंगे, फाइलें बंद होती रहेंगी, उनका कुछ नहीं होगा। क्यों नहीं सरकार इन नक्सलवादियों और आतंकवादियों का खात्मा करती है। उसने कहा- मैं सेना में भर्ती होकर अपने पिता के बलिदान का बदला लूंगी। सीआरपीएफ की 74 बटालियन में तैनात संजय कुमार होली पर अपने घर आए थे।
उसके बाद फोन पर बात होती थी, लेकिन दो दिन से उसकी बात परिजनों से नहीं हुई। सुकमा हमले की टीवी पर आ रही खबर में शहीद संजय का नाम आने से गांव के लोगों में सुगबुगाहट शुरू हो गई थी, लेकिनरात करीब एक बजे बड़े भाई अजय को संजय की शहादत की सूचना फोन पर मिली। इससे पूरा परिवार सदमे में चला गया। शहीद संजय के पड़ोसी बलजेश ने कहा कि संजय बहुत ही मिलनसार थे। उनकी शहादत का पूरे गांव को दुख है। उसके साथ खेली होली हमेशा याद रहेगी। तस्वीर में शहीद संजय कुमार सैल्यूट करतीं एछीसी डॉ. रिचा वर्मा।
सुकमा हमले में शहीद कांगड़ा जिले के चचियां (नगरी) के एएसआई संजय कुमार।
दोस्तों से कहते थे सुरेंद्र नेरचौक से पहला शहीद बनूंगा--गोबिंद ठाकुर, नेरचौक (मंडी)--- छत्तीसगढ़ के सुकमा में शहादत का जाम पीने वाले देश के सपूत सुरेंद्र ठाकुर में देश के लिए मर मिटने का जज्बा था। दोस्तों से अक्सर कहते थे नेरचौक से पहला शहीद वह ही बनेंगे। तस्वीर में छत्तीसगढ़ के सुकमा हमले में शहीद मंडी के नेरचौक के शहीद सुरेंद्र ठाकुर।