16 जुलाई को गुरुपूर्णिमा का बड़ा पर्व तो है ही साथ ही खंडग्रास चंद्रग्रहण भी लगने जा रहा है। चंद्रग्रहण 16 और 17 जुलाई को मध्य रात्रि को लगभग पूरे भारत में आरंभ से समाप्ति तक खंडग्रास के रूप में दिखाई देगा। चंद्रग्रहण की अवधि दो घंटे 59 मिनट की होगी।
वशिष्ट ज्योतिष सदन के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित शशिपाल डोगरा के मुताबिक ग्रहण में चंद्रबिंब दक्षिण-पश्चिम की ओर से ग्रस्त नजर आएगा। भारत में चंद्रग्रहण 16 जुलाई मध्य रात्रि में एक बजकर 31 मिनट पर शुरू होकर 17 जुलाई प्रात: 4 बजकर 30 मिनट पर समाप्त होगा। चंद्र ग्रहण यूरोप, नार्वे, स्वीडन, फिनलैंड के उत्तरी क्षेत्रों और जापान के उत्तर पूर्वी क्षेत्रों को छोड़कर भारत समेत संपूर्ण एशिया, दक्षिणी अमरीका के ज्यादातर हिस्सों में देखा जा सकेगा।
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डॉ. मस्त राम शर्मा
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वैदिक ज्योतिष अनुसंधान संस्थान शिमला के डॉ. मस्त राम शर्मा के अनुसार यह ग्रहण उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के प्रथम चरण में आरंभ होकर द्वितीय चरण में प्रारंभ होगा। इसलिए इस ग्रहण का प्रभाव धनु एवं मकर राशि उत्पन्न जातकों के लिए विशेष रूप से प्रभावकारी रहेगा।
चंद्रग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने कहा कि गभवती को सोने से परहेज करना चाहिए। साथ ही हाथ में किसी तरह के तेजधार हथियार को नहीं लेना चाहिए। प्रभु सिमरन करते हुए ग्रहणकाल की समाप्ति तक जागरण लाभकारी रहेगा। इस दौरान जो किन्हीं रोगों से ग्रस्त हैं, उनके लिए ग्रहणकाल के दौरान किया गया श्रीमहामृत्युंजय मंत्र विशेष लाभ देने वाला है।
उन्होंने कहा कि विभिन्न राशियों पर चंद्रग्रहण का अलग-अलग प्रभाव होगा। तुला तथा मीन राशि के जातकों को जहां लाभ होगा। वहीं धनु, मकर तथा कुंभ राशियों के जातकों को ग्रहण के दौरान सावधान रहने की आवश्यकता होगी। शेष राशियों के जातकों के लिए चंद्रग्रहण मिश्रित फल देने वाला होगा। चंद्रग्रहण के बाद सात अनाजों का दान करना शुभ होगा। साथ ही पवित्र नदियों में स्नान भी लाभकारी होगा।