बॉलीवुड में हर बीट पर फिल्में बनाई जाती हैं। बात 1960-70 के दशक की है जब घर और समाज में औरतों का सामाजिक उत्पीड़न और सेक्सुअल हरासमेंट जैसी तकलीफों का सामना करना पड़ता था। ऐसे में फिल्म जगत में इस अन्याय को पर्दे पर उतारा गया। लेकिन आपको बता दें कि इस दौर में रेप वाले सीन एक्ट्रेस नजीमा पर सबसे ज्यादा फिल्माए जाते थे..आइए जानते हैं इनके बारे में
फिल्मी दुनिया में नजीमा को ज्यादातर बहन या फिर एक्ट्रेस की सहेली का किरदार मिला करता था और जाहिर था कि फिल्म में नजीमा पर रेप सीन फिल्माने के लिए उन्हें यह किरदार दिया जाता था। बता दें कि मासूम और खूबसूरत चेहरे की बदौलत निर्देशक उन्हें हीरो की बहन के किरदार के लिए खूब पसंद करते थे।
बता दें कि नजीमा महाराष्ट्र के नासिक में 1948 में पैदा हुई थीं। शुरुआत से नजीमा का फिल्मों की तरफ बड़ा रुझान था। उन्होंने बतौर बाल कलाकार बेबी चांद, हम पंछी एक डाल के जैसी फिल्मों में दमदार अभिनय से लोगों का दिल जीता। बॉलीवुड में उनके अभिनय को खूब सराहा गया है।
बता दें कि 1960 से 70 के दशक में फिल्मो में रेप सीन को प्रमुखता से लिया जाता था। यहां तक कि कई फिल्मों की पूरी कहानी रेप पर ही टिकी होती थी और इस रोल के लिए डायरेक्टर की सबसे पहली च्वॉइस नजीमा ही हुआ करती थीं। बॉलीवुड में रेप के सीन करते-करते उन्हें रेप की रानी भी कहा जाने लगा था।
अगर बात करें नजीमा के फिल्मी करियर की उन्होंने फिल्म निशान (1965), राजेंद्र कुमार के साथ फिल्म आरज़ू (1965), दिल्लगी,(1966), तमन्ना(1969), अनजाना(1969) जैसी फिल्मों में सपोर्टिंग रोल किए और फिल्म की कहानी के आधार पर इन्हें ज्यादातर बहन का ही किरदार मिला। 1972 में आई फिल्म 'बेईमान' में उन्होंने एक्टर मनोज कुमार के सामने अपने अभिनय का शानदार प्रदर्शन किया। इस फिल्म के लिए उन्हें फिल्म फेयर अवार्ड से भी नवाजा गया था। नाजीमा की आखिरी फिल्म 'लव एंड गॉड' थी जो उनकी मृत्यु के बाद रिलीज हुई थी।