धोबीघाट के ऊपर करेंखाल (बछेली) के जंगल में घास लेने गई एक महिला को गुलदार ने मार डाला। दो अन्य महिलाओं ने किसी प्रकार भागकर जान बचाई। घटना से आक्रोशित स्थानीय लोगों ने गुलदार को आदमखोर घोषित कर मारने की मांग के लिए खंडाह में पौड़ी-श्रीनगर हाईवे जाम कर दिया। उन्होंने डीएफओ के मौके पर नहीं पहुंचने पर रोष जताया। बाद में रेंजर अनिल भट्ट के लिखित आश्वासन लोग जाम खोलने पर राजी हुए। रेंजर ने बताया कि घटना के बारे में उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।
गुलदार के आदमखोर घोषित होने के बाद उसको मारने के लिए शूटर तैनात किए जाएंगे। फिलहाल लोगों की सुरक्षा को देखते वहां वन कर्मी गश्त करेंगे। साथ ही पिंजड़े भी वहां लगाए जा रहे हैं। सोमवार सुबह श्रीनगर के लोअर भक्तियाना निवासी मीनाक्षी नौटियाल (40 वर्ष) पत्नी हरीश अन्य महिलाओं के साथ घास लेने जंगल को निकली थी। घास काटने के बाद सभी महिलाएं सुबह करीब सात बजे लौटने की तैयारी कर रही थी, तभी झाड़ियों में छिपे गुलदार ने अचानक मीनाक्षी पर हमला कर दिया। गुलदार मीनाक्षी के गले को मुंह में दबाते हुए लगभग 100 मीटर नीचे ले गया।
साथ गई अन्य दोनों महिलाओं के शोर मचाने पर पास में ही पेड़ काट रहे मजदूर घटनास्थल पर पहुंचे। वहां से एक मजदूर ने भक्तियाना किसी को फोन किया। तब क्षेत्र में इस घटना का पता चला। इसी दौरान बछेली गांव से भी महिलाएं उसी जंगल में घास लेने जा रही थीं। उनके भी शोर मचाने पर बछेली और खंडाह गांव से लोग जंगल में पहुंचे। सूचना मिलने पर कोतवाली पुलिस, एसडीआरएफ और वन विभाग की टीम भी घटनास्थल पर पहुंची। लगभग चार घंटे की मशक्कत के बाद गुलदार के हमले में मारी गईं महिला के शव को सड़क पर लाया जा सका।
टीम शव लेकर अस्पताल जा रही थी, तभी ग्रामीणों ने पौड़ी राजमार्ग जाम कर दिया। उन्होंने डीएफओ के मौके पर न पहुंचने पर आक्रोश जताते हुए गुलदार को मारने के लिए शटर तैनात करने की मांग की। खंडाह में काफी देर तक महिला के शव को ले जा रहा वाहन भी फंसा रहा। कोतवाल एनएस बिष्ट ने सड़क से हटने की अपील की, लेकिन लोग नहीं हटे। इसके बाद पुलिस धरनास्थल पर मृतका के पति हरीश को लाई। उसने रोते बिलखते लोगों से सड़क से हटने का अनुरोध किया। कुछ मान गए और कुछ नहीं माने। तब पुलिस ने जबरन शव ले जा रहे वाहन को जाम स्थल से निकाला।
मृतका मीनाक्षी पर ही पूरे घर की जिम्मेदारी थी। वह गाय का दूध बेचकर किसी तरह परिवार का गुजर बसर करती थी। वह रोज सुबह लगभग 6 बजे भक्तियाना से करीब 4 किलोमीटर दूर जंगल में घास लेने जाती थी। उसके देवर गिरीश नौटियाल ने बताया कि भाई हरीश बेेरोजगार है, जबकि भतीजी बीएससी और भतीजा पॉलीटेक्निक कर रहा है। स्थानीय निवासी योगेंद्र बडोनी, प्रदीप नेगी, महेंद्र असवाल, जयपदी, मनीष खंडूड़ी, शिव कुमार और सतीश महाजन आदि ने डीएफओ को ज्ञापन भेजकर मृतका के आश्रितों को उचित मुआवजा और रोजगार देने की मांग की।