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नवाचार: प्रदेश के सभी सरकारी अस्पताल आज से कागज-रहित, सेहत का रिकॉर्ड अब डिजिटल
Sun, 01 Nov 2026 10:57 AM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Sun, 01 Nov 2026 10:57 AM IST
मध्य प्रदेश में एक नवंबर से सभी सरकारी अस्पतालों को पेपरलेस बनाने की व्यवस्था लागू की जा रही है। ओपीडी पंजीकरण, जांच, डॉक्टर परामर्श, दवा वितरण और बिलिंग डिजिटल होगी। मरीजों को मोबाइल पर पर्ची मिलेगी। सिस्टम आभा से जुड़ेगा, जिससे स्वास्थ्य रिकॉर्ड सुरक्षित रहेंगे और इलाज की प्रक्रिया आसान होगी।
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प्रदेश के सरकारी अस्पताल की व्यवस्थाएं डिजिटल करने की तैयारी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्य प्रदेश का स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग आज एक नवंबर को राज्य स्थापना दिवस पर प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों को पूरी तरह से कागज रहित बनाने जा रहा है।
इस नई व्यवस्था को मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पतालों से लेकर स्थानीय स्तर के उप-स्वास्थ्य केंद्रों तक प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा। नए तंत्र के लागू होने के बाद बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) का पंजीकरण पर्चा सीधे मरीजों के मोबाइल फोन पर एसएमएस या डिजिटल रूप में उपलब्ध कराया जाएगा।
डिजिटल प्रणाली से इलाज की सुविधा
इस डिजिटल व्यवस्था के दायरे में ओपीडी पंजीकरण, प्रयोगशाला परीक्षण, डॉक्टर परामर्श, फार्मेसी, जांच और बिलिंग की सभी प्रक्रियाएं शामिल रहेंगी। योजना के अंतर्गत प्रदेश के प्रत्येक सरकारी डॉक्टर को एक टैबलेट दिया जाएगा। इस टैबलेट में विभिन्न बीमारियों के इलाज के लिए उपलब्ध दवाओं की पूरी सूची दर्ज होगी। डॉक्टर दवाओं की उपलब्धता के आधार पर ही मरीजों को दवाएं लिखेंगे।
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आभा से जोड़ा जा रहा है सिस्टम
इस पूरी प्रणाली को आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता (आभा) से भी जोड़ा जाएगा, जिससे मरीजों के स्वास्थ्य संबंधी रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेंगे। डॉक्टरों द्वारा लिखे गए पर्चे सीधे फार्मेसी काउंटर पर पहुंचेंगे और जांच के अनुरोध अपने आप अपडेट हो जाएंगे, जिससे अस्पतालों में होने वाले भ्रम दूर होंगे और मरीजों के समय की बचत होगी।
गांधी मेडिकल कॉलेज में पायलट प्रोजेक्ट
गांधी मेडिकल कॉलेज में बीते छह महीने से इस व्यवस्था को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में संचालित किया जा रहा है। वर्तमान समय में इसे मेडिसिन, स्किन और साइकियाट्रिक विभागों में अपनाया गया है। अब इस व्यवस्था को कॉलेज के सभी विभागों में भी लागू किया जाएगा। ओपीडी के पूरी तरह से कागज रहित हो जाने के बाद मरीजों को डिजिटल पर्चियां मिलेंगी और उन्हें सीधे संबंधित डॉक्टरों तथा पैरामेडिकल स्टाफ को भेजा जाएगा।
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इस नई व्यवस्था को मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पतालों से लेकर स्थानीय स्तर के उप-स्वास्थ्य केंद्रों तक प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा। नए तंत्र के लागू होने के बाद बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) का पंजीकरण पर्चा सीधे मरीजों के मोबाइल फोन पर एसएमएस या डिजिटल रूप में उपलब्ध कराया जाएगा।
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डिजिटल प्रणाली से इलाज की सुविधा
इस डिजिटल व्यवस्था के दायरे में ओपीडी पंजीकरण, प्रयोगशाला परीक्षण, डॉक्टर परामर्श, फार्मेसी, जांच और बिलिंग की सभी प्रक्रियाएं शामिल रहेंगी। योजना के अंतर्गत प्रदेश के प्रत्येक सरकारी डॉक्टर को एक टैबलेट दिया जाएगा। इस टैबलेट में विभिन्न बीमारियों के इलाज के लिए उपलब्ध दवाओं की पूरी सूची दर्ज होगी। डॉक्टर दवाओं की उपलब्धता के आधार पर ही मरीजों को दवाएं लिखेंगे।
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आभा से जोड़ा जा रहा है सिस्टम
इस पूरी प्रणाली को आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता (आभा) से भी जोड़ा जाएगा, जिससे मरीजों के स्वास्थ्य संबंधी रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेंगे। डॉक्टरों द्वारा लिखे गए पर्चे सीधे फार्मेसी काउंटर पर पहुंचेंगे और जांच के अनुरोध अपने आप अपडेट हो जाएंगे, जिससे अस्पतालों में होने वाले भ्रम दूर होंगे और मरीजों के समय की बचत होगी।
गांधी मेडिकल कॉलेज में पायलट प्रोजेक्ट
गांधी मेडिकल कॉलेज में बीते छह महीने से इस व्यवस्था को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में संचालित किया जा रहा है। वर्तमान समय में इसे मेडिसिन, स्किन और साइकियाट्रिक विभागों में अपनाया गया है। अब इस व्यवस्था को कॉलेज के सभी विभागों में भी लागू किया जाएगा। ओपीडी के पूरी तरह से कागज रहित हो जाने के बाद मरीजों को डिजिटल पर्चियां मिलेंगी और उन्हें सीधे संबंधित डॉक्टरों तथा पैरामेडिकल स्टाफ को भेजा जाएगा।
