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Bhojshala Case: हाईकोर्ट में हिंदू पक्ष की मांग, भोजशाला में सिर्फ हिंदुओं को मिले पूजा की अनुमति

Sat, 09 May 2026 09:04 AM IST
Abhishek Chendke न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: Abhishek Chendke Updated Sat, 09 May 2026 09:04 AM IST
सार
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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में भोजशाला मामले की सुनवाई के दौरान हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से एएसआई के 7 अप्रैल 2003 के आदेश को चुनौती दी गई। हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने अदालत में मांग की कि भोजशाला परिसर के मूल धार्मिक स्वरूप को बहाल किया जाए और वहां केवल हिंदुओं को पूजा की अनुमति दी जाए।

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Indore: Bhojshala hearing - Petitioner said, only Hindu families should be allowed to worship.
भोजशाला पर फिर गरमाई सियासत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्यप्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर को लेकर चल रहे विवाद में शुक्रवार को हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से अदालत में मांग की गई कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी एएसआई को भोजशाला परिसर के मूल धार्मिक स्वरूप को बहाल करने का निर्देश दिया जाए और वहां केवल हिंदुओं को पूजा की अनुमति दी जाए।

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एएसआई के 2003 के आदेश को दी चुनौती

हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के वकील विष्णु शंकर जैन ने न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और आलोक अवस्थी की खंडपीठ के समक्ष एएसआई के 7 अप्रैल 2003 के आदेश को चुनौती दी। इस आदेश के तहत हिंदुओं को हर मंगलवार पूजा करने और मुसलमानों को हर शुक्रवार नमाज अदा करने की अनुमति दी गई है।
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वकील विष्णु शंकर जैन ने अदालत में कहा कि एएसआई का यह आदेश प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम 1958 का खुला उल्लंघन है। उन्होंने तर्क दिया कि कानून स्पष्ट रूप से कहता है कि किसी संरक्षित स्मारक या तीर्थ स्थल का उपयोग उसके मूल स्वरूप के विपरीत उद्देश्य के लिए नहीं किया जा सकता।

पूजा के अधिकार के उल्लंघन का आरोप

हिंदू पक्ष की ओर से कहा गया कि एएसआई के आदेश के आधार पर लागू व्यवस्था हिंदुओं के पूजा के अधिकार का उल्लंघन करती है। साथ ही उन्होंने मुस्लिम पक्ष की उस आपत्ति को भी खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि यह मामला जनहित याचिका नहीं बल्कि सिविल विवाद है और इसकी सुनवाई सिविल कोर्ट में होनी चाहिए।

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मुस्लिम पक्ष ने पूजा स्थल अधिनियम का दिया हवाला

सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष ने अदालत में तर्क दिया कि धार स्थित यह विवादित स्मारक 15 अगस्त 1947 यानी स्वतंत्रता के समय एक मस्जिद के रूप में मौजूद था। इसलिए पूजा स्थल विशेष प्रावधान अधिनियम 1991 के तहत इसके धार्मिक स्वरूप को बदला नहीं जा सकता। इस पर हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने जवाब देते हुए कहा कि यह कानून भोजशाला परिसर पर लागू नहीं होता, क्योंकि यह एएसआई द्वारा संरक्षित स्मारक है।

हिंदू पक्ष ने कहा- भोजशाला मंदिर है, मस्जिद नहीं

एक अन्य हिंदू याचिकाकर्ता कुलदीप तिवारी की ओर से पेश वकील मनीष गुप्ता ने अदालत में दावा किया कि सामान्य मस्जिदों की तरह इस विवादित स्मारक में न तो मीनार है और न ही वजूखाना। उन्होंने कहा कि भोजशाला मस्जिद नहीं बल्कि एक मंदिर है। मामले में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 11 मई तय की है।

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