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LIVE: नेपाल में बाढ़ से तबाही, मरने वालों की संख्या बढ़कर 157 हुई, सैकड़ों अब भी लापता; राहत-बचाव कार्य जारी

Thu, 27 Aug 2026 01:04 AM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू। Published by: निर्मल कांत Updated Thu, 27 Aug 2026 01:04 AM IST
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LIVE: Nepal flood live updates death toll rises rescue operation missing including indians
नेपाल बाढ़। - फोटो : पीटीआई

लाइव अपडेट

01:04 AM, 27-Aug-2026

चीन ने तुरंत जानकारी देने पर जताई सहमति

बाढ़ से हुए नुकसान के बाद बुधवार दोपहर नेपाल के जल विज्ञान और मौसम विज्ञान विभाग तथा चीन के मौसम विज्ञान प्रशासन के अधिकारियों के बीच ऑनलाइन बैठक हुई। इसके बाद चीन ने सहमति जताई कि सीमा के अपनी तरफ पानी का स्तर बढ़ना शुरू होते ही वह नेपाल को जानकारी देगा। नेपाल और चीन के बीच आपदा के खतरे को कम करने और आपात स्थिति में एक-दूसरे की मदद करने को लेकर पहले से समझौता है।
01:03 AM, 27-Aug-2026

हिमस्खलन के कारण आई अचानक बड़ी बाढ़

विशेषज्ञों ने कहा है कि अचानक आई इस विशाल बाढ़ की वजह ल्हेंडे नदी का रास्ता हिमस्खलन से बंद होना था। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण ने भी कहा है कि शुरुआती जांच में नेपाल-चीन सीमा के इलाके में हिमस्खलन की बात सामने आई है।

प्राधिकरण ने प्लैनेट लैब्स से मिली उपग्रह तस्वीरों का अध्ययन किया। इसके बाद कहा गया कि ल्हेंडे नदी में मलबे के साथ आई बाढ़ संभवत: हिमस्खलन के कारण शुरू हुई। यह हिमस्खलन तिब्बत में रसुवागढ़ी सीमा चौकी से करीब 20 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में हुआ था। 25 और 26 अगस्त की उपग्रह तस्वीरों में हिमस्खलन और इसके बाद ल्हेंडे नदी में आई बाढ़ दिखाई देती है।
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01:02 AM, 27-Aug-2026

विशेषज्ञ बोले- चेतावनी की व्यवस्था मजबूत करनी होगी

राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण के पूर्व कार्यकारी प्रमुख अनिल पोखरेल ने कहा कि पहले भी ऐसी समस्याएं सामने आ चुकी हैं। जब चीन की तरफ से बाढ़ आती थी, तब भी ऐसी दिक्कत हुई थी। लेकिन इस समस्या को गंभीरता से नहीं लिया गया। उन्होंने कहा, हमें अभी भी पता नहीं है कि कितना खतरा बाकी है। 

उन्होंने कहा कि जब तक नेपाल का विदेश मंत्रालय चीन के संबंधित अधिकारियों के साथ मिलकर ऐसी व्यवस्था नहीं बनाता, जिससे शुरुआती चेतावनी नेपाल के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण तक पहुंच सके, तब तक यह समस्या बनी रहेगी। पोखरेल ने कहा कि सरकार को यह सोचना होगा कि वह आपदा आने के बाद केवल राहत और बचाव तक सीमित रहेगी या पहले से ऐसी व्यवस्था बनाएगी, जिससे आपदा में लोगों की जान न जाए।
12:59 AM, 27-Aug-2026

समय पर जानकारी नहीं मिलने से बढ़ा नुकसान

अधिकारियों का कहना है कि अचानक आई बाढ़ की सही जानकारी समय पर नहीं मिलने से जान और संपत्ति का भारी नुकसान हुआ। रसुवा जिला प्रशासन कार्यालय के अधिकारियों ने कहा कि उन्हें तिब्बत से शुरू हुई इस बाढ़ के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। 

इस घटना के बाद एक बड़ा सवाल उठ रहा है। क्या नेपाल में लोगों को बाढ़ की चेतावनी तभी मिलेगी, जब पानी उनकी नदियों में पहुंच जाएगा? या फिर ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र में कोई घटना होते ही नेपाल को इसकी जानकारी मिल जाए? समस्या केवल नेपाल और चीन के बीच जानकारी साझा करने तक सीमित नहीं है। नेपाल ने अपने इलाके में जो उपकरण लगाए हैं, वे भी बाढ़ आने से पहले चेतावनी देने में नाकाम रहे।
12:57 AM, 27-Aug-2026

पिछले साल भी इसी नदी में आई थी बाढ़

भोटे कोशी नदी में पिछले साल भी बाढ़ आई थी। उस समय जिन इलाकों को नुकसान हुआ था, वे अभी सामान्य स्थिति में लौट भी नहीं पाए थे। पिछले साल 8 जुलाई को ल्हेंडे नदी में आई बाढ़ में 11 लोगों की मौत हुई थी। इस बाढ़ ने कई जगह सड़क के हिस्सों को भी बहा दिया था। बाढ़ में नेपाल और चीन को जोड़ने वाला मितेरी पुल भी बह गया था।
12:57 AM, 27-Aug-2026

सैकड़ों घर बह गए

नुवाकोट के बिदुर नगर पालिका के वार्ड नंबर 7 के अध्यक्ष रवींद्र नेपाल ने बताया कि बाढ़ ने सोले से अक्करे बाजार तक सैकड़ों घरों को बहा दिया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग सुरक्षित जगह पहुंचने में कामयाब रहे। लेकिन कई बुजुर्ग और बच्चे अभी भी लापता हैं। उन्होंने कहा, मैं सुबह से ही नगर पालिका की इमारत में फंसा हुआ हूं। घर जाने के लिए न सड़क बची है और न पुल।

बिदुर नगर पालिका-7 के डंडाथोक टुप्चे के रहने वाले गोकरण अधिकारी ने बताया कि उनके गांव में कुछ भी नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि उनके जानने वाले ज्यादातर लोग अभी भी लापता हैं। उन्होंने बताया कि सोले और अक्करे बाजार के बीच करमेटार में केवल कुछ घर ही खड़े हैं। उन्होंने कहा, दूर से जो घर सही दिख रहे हैं, वे भी पूरी तरह मिट्टी और मलबे से ढके हुए हैं।
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12:32 AM, 27-Aug-2026

LIVE: नेपाल में बाढ़ से तबाही, मरने वालों की संख्या बढ़कर 157 हुई, सैकड़ों अब भी लापता; राहत-बचाव कार्य जारी

भोटे कोशी नदी में बुधवार सुबह करीब 10 बजे अचानक आई बाढ़ ने नेपाल के तीन जिलों में भारी तबाही मचा दी। इसमें कम से कम 157 लोगों की मौत हो गई। सुरक्षा बलों के जवान और विदेशी पर्यटक समेत बड़ी संख्या में लोग लापता हैं। निजी और सरकारी संपत्ति भी बह गई। यह हाल के वर्षों में नेपाल की सबसे बड़ी आपदाओं में से एक है। 

हिमस्खलन से भोटे कोशी नदी की सहायक नदी ल्हेंडे का मार्ग बंद हो गया था, जिससे यह बाढ़ आई। बाढ़ ने सबसे पहले चीन की सीमा के पास रसुवागढ़ी के नजदीक तिमुरे को अपनी चपेट में लिया। यहां सैकड़ों लोग रहते थे। बाढ़ आने से पहले ही इस बस्ती का बड़ा हिस्सा बह गया। इसके बाद पानी तेजी से नीचे की ओर बढ़ा।

इलाके में बारिश की कोई खबर नहीं थी। इसलिए लोगों को बाढ़ आने का कोई अंदाजा नहीं था। लोग रोज की तरह अपने काम में लगे थे। तभी अचानक बाढ़ आ गई। रसुवा के मुख्य सीमा शुल्क अधिकारी राजेंद्र ढुंगाना ने बताया कि बुधवार सुबह जब उन्हें जमीन हिलती हुई महसूस हुई, तो उन्हें पहले लगा कि भूकंप आया है। वह बाहर भागे। तब उन्होंने पानी की एक बहुत बड़ी दीवार देखी। पानी के साथ धुएं जैसा कुछ भी दिखाई दे रहा था। यह पानी ऊपर की तरफ से तेजी से तिमुरे बाजार की ओर आ रहा था। बाढ़ स्याफ्रुबेसी की ओर बढ़ती हुई आगे के इलाकों तक पहुंच गई। नदी के रास्ते में जो कुछ भी आया, वह बह गया। इसमें लोग, जानवर, इमारतें और सरकारी ढांचे भी शामिल थे।

प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, सैकड़ों लोग लापता हैं। इनमें 391 विदेशी नागरिक और 44 सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं। 

नौ जलविद्युत परियोजनाएं और नौ बैंक शाखाएं तबाह बुधवार की बाढ़ ने नौ जलविद्युत परियोजनाओं को पूरी तरह नष्ट कर दिया। इतनी ही संख्या में वाणिज्यिक बैंकों की शाखाएं भी तबाह हो गईं। शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक, बाढ़ में 19 पुल और 40 किलोमीटर सड़क बह गई। निजी और सरकारी संपत्ति को हुए नुकसान का अभी पूरा आकलन नहीं हो पाया है।

लापता लोगों की बड़ी संख्या और भारी तबाही को देखते हुए सुरक्षा अधिकारियों और आपदा विशेषज्ञों का कहना है कि यह बाढ़ नेपाल के हाल के इतिहास की सबसे खतरनाक आपदाओं में से एक हो सकती है। यह बाढ़ 1993 में सरलाही, रौतहट और मकवानपुर में आई बाढ़ से भी बड़ी आपदा साबित हो सकती है। उस बाढ़ में 1,400 लोगों की मौत हुई थी। लंबे समय से इसे नेपाल की सबसे बड़ी आपदा माना जाता है।
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