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ICMR: मेडिकल रिसर्च को लेकर नई गाइडलाइन, अब छोटे अस्पताल भी बड़ी रिसर्च का बन सकेंगे हिस्सा

Thu, 20 Aug 2026 07:55 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Thu, 20 Aug 2026 07:55 PM IST
सार
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आईसीएमआर  ने मेडिकल रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। इसका उद्देश्य छोटे अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों को भी बड़े मेडिकल शोध का हिस्सा बनने का अवसर देना है। इससे देश में रिसर्च का दायरा बढ़ने, अलग-अलग क्षेत्रों से बेहतर स्वास्थ्य डेटा मिलने और मरीजों से जुड़ी समस्याओं पर अधिक व्यापक अध्ययन किए जाने की उम्मीद है।

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ICMR Issues New Guidelines for Medical Research Enabling Small Hospitals to Participate in Major Studies
मेडिकल रिसर्च - फोटो : Freepik.com

विस्तार

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने मेडिकल रिसर्च को लेकर नई गाइडलाइन तैयार की है। इसके तहत अब छोटे अस्पताल भी बड़ी स्टडी का हिस्सा बन सकेंगे। आईसीएमआर के अनुसार, कई अस्पतालों और रिसर्च सेंटर में एक साथ होने वाली मेडिकल स्टडी के लिए सिंगल एथिक्स रिव्यू की व्यवस्था की गई है।

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मतलब एक ही रिसर्च अगर 10 या 20 अस्पतालों में हो रही है तो हर अस्पताल की एथिक्स कमेटी को पूरी रिसर्च की अलग-अलग जांच करने की जरूरत नहीं होगी। एक तय एथिक्स कमेटी पूरी स्टडी की जांच कर मंजूरी दे सकेगी। इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा छोटे अस्पतालों, ग्रामीण इलाकों के सेंटर और कम सुविधाओं वाले रिसर्च सेंटर को मिल सकता है।
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जिन सेंटर के पास अपनी एथिक्स कमेटी नहीं है, वे भी बड़ी मेडिकल रिसर्च का हिस्सा बन सकेंगे। एक कमेटी से मंजूरी मिलने का मतलब यह नहीं है कि मरीजों की सुरक्षा की जिम्मेदारी खत्म हो जाएगी।

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ICMR Issues New Guidelines for Medical Research Enabling Small Hospitals to Participate in Major Studies
मेडिकल शोध - फोटो : Adobe Stock Images

रिसर्च के दौरान मरीजों की सुरक्षा पर नजर रखना, गंभीर घटनाओं की जानकारी देना और रिसर्च के नियमों का पालन करना जरूरी रहेगा।
 

  • रिसर्च में कोई बड़ा बदलाव होता है या मरीजों की सुरक्षा से जुड़ी समस्या सामने आती है तो उसकी जानकारी भी तय प्रक्रिया के तहत देनी होगी।
  • यानी रिसर्च की मंजूरी एक जगह से मिल सकती है, लेकिन मरीजों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सभी संबंधित अस्पतालों की रहेगी।


कई अस्पतालों में होने वाली रिसर्च को एक ही एथिक्स कमेटी देगी मंजूरी

बड़ी संख्या में मरीजों के शामिल होने से फायदा  आईसीएमआर की इस नई व्यवस्था का असर सिर्फ रिसर्च की मंजूरी तक सीमित नहीं रहेगा। अगर छोटे अस्पताल और गांवों के आसपास के सेंटर बड़ी मेडिकल स्टडी से जुड़ते हैं तो रिसर्च में अलग-अलग इलाकों के मरीज शामिल हो सकेंगे। इससे किसी बीमारी, नई दवा या इलाज के तरीके पर होने वाली स्टडी में सिर्फ बड़े शहरों के मरीजों के बजाय देश के अलग-अलग हिस्सों के लोगों को शामिल करना आसान होगा।





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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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