आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

आज का शब्द: निश्छल और जयशंकर प्रसाद की रचना- मेरे नाविक! धीरे-धीरे

आज का शब्द- निश्छल और जयशंकर प्रसाद की रचना: ले चल वहाँ भुलावा देकर
                
                                                         
                            'निश्छल' का अर्थ होता है- छल- कपट से रहित, सरल प्रकृति का या सीधा। अमर उजाला  'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखा में आज का शब्द है- निश्छल। प्रस्तुत है जयशंकर प्रसाद की कविता: ले चल वहाँ भुलावा देकर
                                                                 
                            

ले चल वहाँ भुलावा देकर, मेरे नाविक! धीरे-धीरे। 

जिस निर्जन में सागर लहरी, अंबर के कानों में गहरी— 
निश्छल प्रेम-कथा कहती हो, तज कोलाहल की अवनी रे ! 

जहाँ साँझ-सी जीवन-छाया ढीले अपनी कोमल काया, 
नील नयन से ढुलकाती हो, ताराओं की पाँति घनी रे ! आगे पढ़ें

3 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर