तवील हो गया है, इंतजार सुबह-ओ-शाम का।
कोसों दूर है मुझसे,करार सुबह-ओ-शाम का।।
सर-ए-बज़्म जिसको, यूं कहते हो तुम रौनक।
घर-आंगन बना है,बाजार सुबह-ओ-शाम का।।
-यूनुस खान
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