मेरी ख़ामोशी को वो इकरार समझ बैठा।
आदतन, यूं इशारे को करार समझ बैठा।।
हिम्मत करके आज सच बोल दिया मैंने।
मगर साफगोई को वो, खार समझ बैठा।।
-यूनुस खान
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