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एक मुद्दत से क़ैद-बाम-ओ-दर था मैं तो।

                
                                                         
                            तूने ही तो,हस्ब-ए-हालात ढाला मुझको।
                                                                 
                            
मैं तो गिर रहा था, तूने संभाला मुझको।।

एक मुद्दत से क़ैद-बाम-ओ-दर था मैं तो।
क्यूं तूने इस क़ैद से यूं निकाला मुझको।।
-यूनुस खान
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10 घंटे पहले

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