मेरे गिले-शिकवे भी बेमानी समझता है।
वो, कब मेरे घर की वीरानी समझता है।।
हर शाम , एक नये दर्द से गुजरता हूं मैं।
नये जख्म को वो चोट पुरानी समझता।।
-यूनुस खान
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