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इन्हीं राहों पर चलते हैं , साथ मिलकर।

                
                                                         
                            यकीनन ही तेरी बज़्म में,दीवाने आयेंगे।
                                                                 
                            
मयकश, जैसे चलकर मयखाने आयेंगे।।

तुम , यहां कोई शम्मा जलाओ तो सही।
उजालों की जानिब , ये परवाने आयेंगे।।

जिद छोड़कर थोड़ा यूं करीब तो आओ।
फिर लौटकर वही पुराने ज़माने आयेंगे।।

इन्हीं राहों पर चलते हैं , साथ मिलकर।
रात गुजारने को जरूर ठिकाने आयेंगे।।
-यूनुस खान
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