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कोई ग़ज़ल कहूं,या कुछ अशआर कह दूं

                
                                                         
                            कोई ग़ज़ल कहूं,या कुछ अशआर कह दूं।
                                                                 
                            
अगर तू कहे, तो खिजां को बहार कह दूं।।

ये तर्क-ए-ताल्लुक़ अब बर्दाश्त नहीं होता।
जी करता है अब ये सर-ए-बाज़ार कह दूं।।
-यूनुस खान
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2 महीने पहले

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