न हो साथ कोई, मैं अकेला सहस्रबाहु बन जाऊंगा।
आज अकेला हूँ मैं, कल शून्य से हजार बनाऊंगा।
नहीं चाटूंगा मैं किसी के तलवे, न कहीं शीश झुकाऊंगा।
आज वक्त नहीं मेरे साथ, पर मैं अब वक्त को भी गुलाम बनाऊंगा।
चाहे लगा दूं जी-जान मैं अपनी, पर इस लायक बनकर दिखलाऊंगा।
कोई भी आए सामने मेरे, तूफानों, पहाड़ों, दरिया से लड़ जाऊंगा।
-विशाल कुमार वर्मा
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