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हर बात की सज़ा

                
                                                         
                            मुझे मालुम है पढ़ाई।
                                                                 
                            
मुझे मालुम है नशा।
मुझे मालुम है मजा।
मुझे मालुम है हर बात की सज़ा।
मैंने बेक़सूर होकर भी मार खाया है।
मैं कोई इंसान नहीं, ख़ुदा कि माया है।
मुझे ख़ुदा ने ही इंसान बताया है।
मुझमें मोहब्बत करने की ताक़त खुदा ने ही दी है।
मैं कोई महान नहीं बल्कि, साधारण सा लड़का हूँ।
मौन धारण करना मेरा निजी खेल है।
ख़ुदा की लाठी में मेरा ही मेल है।
मैं नहीं रूठता इंसानों से।
मैंने तो कबका अपने गुनहगार को माफ कर दिया।
वो खेल अब पुराना होगया।
जिसमें सज़ा सुनाई जाती थी गुनहगार को।
ताकतवर तो वो होता है, जो माफ करदे अपने गुनहगार को।
मैंने ख़ुदा को अपना माना है।
इंसानों से मेरा पुराना नाता है।
दिल साफ रखना मुझको आया है।
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3 महीने पहले

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