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किनारा कर लिया

                
                                                         
                            प्यार के हर दर्द से किनारा कर लिया,
                                                                 
                            
झूठा ही सही, दिल तुमने हमारा रख लिया।

हम तो उम्र भर तुम्हें अपना समझते रहे,
तुमने मुस्कुराकर हर इशारा रख लिया।

ज़ख़्म भी दिए, मरहम का वादा भी किया,
कैसा तुमने इश्क़ का नज़ारा रख लिया।

हमने तो वफ़ा को ही इबादत मान लिया,
तुमने दिल का सौदा भी गवारा रख लिया।

महफ़िलों में हँसते रहे, तन्हाइयों में रोते रहे,
हर आँसू ने तेरा ही सहारा रख लिया।

दिल की किताब का हर सफ़ा तेरे नाम रहा,
हमने हर लफ़्ज़ में तेरा नज़ारा रख लिया।

टूटकर भी मुस्कुराने का हुनर सीख लिया,
दर्द को ही हमने अपना सितारा रख लिया।

अब न कोई शिकवा है, न कोई गिला रहा,
वक़्त ने हर दर्द का हिसाब करा दिया।

तुम जहाँ भी रहो, आबाद रहो उम्र भर,
हमने अपनी दुआओँ में तुम्हें बसा लिया।

प्यार अगर सच्चा था, लौटकर आएगा कभी,
इसी उम्मीद ने हमें अब तक सँभाल लिया।

मिलना अगर मुक़द्दर में लिखा होगा कभी,
रब ने हर फ़ैसला पहले से सजा रखा होगा।

वरना हम भी अब इश्क़ की राह छोड़ चुके,
प्यार के हर दर्द से किनारा कर लिया।
- विकास त्रिपाठी 'विक्की'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

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