तुम्हें पाने की ज़िद कभी की ही नहीं,
बस उम्र भर चाहने का हौसला रखा।
तुम किसी और की दुनिया बन गए,
फिर भी दिल ने तुम्हारा रास्ता रखा।
शिकायतों की किताब कभी खोली नहीं,
हर दर्द को ख़ामोशी से अपना रखा।
तुमने समझा होगा भूल गया हूँ तुम्हें,
मैंने हर याद को दिल में ज़िंदा रखा।
वक़्त ने बहुत कुछ बदल दिया मगर,
तेरा नाम आज भी दुआ में रखा।
मोहब्बत अगर सौदा होती दुनिया में,
मैंने हर ख़ुशी देकर भी तुझे ही रखा।
तुम लौटो या कभी न लौटो,
मैंने इश्क़ को इश्क़ ही रखा।
— विकास त्रिपाठी "विक्की"
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