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त्राहीमाम भोले त्राहिमाम

                
                                                         
                            त्राहिमाम भोले त्राहिमाम
                                                                 
                            

भक्ति और भावना
उपासना और प्रार्थना
भोले तेरे चरणों में
भक्ति की ही कामना
त्राहिमाम भोले त्राहिमाम! !

कालरात्रि जगी
ब्रह्मपिशाचनी जगी
विश्व तमस में डूब रहा
बस तुम्हीं से आस है लगी!!
शिवभक्ति मेरी साधना,
भोले तेरी आराधना
श्रुति में ही सिद्ध हों-
शिवनाम को पुकारना
त्राहिमाम भोले त्राहिमाम!!

दृग हैं मेरे सजल
कैसे पीयूं मैं यह गरल
प्रचंड अग्नि जले उर में
काला पड़ा है व्योम सकल !!
हलाहल की वृष्टि है
काल की क्रूर दृष्टि है
प्रलाप करती समस्त सृष्टि है
शिवभक्ति में खड़ी, मेरी देहयष्टि है
त्राहिमाम भोले त्राहिमाम !!
-विकास कुमार साव
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9 घंटे पहले

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