शाम से ऑंखें उसको तकती रहती थीं।
चाँद का छत पे आना जाना पहले था।
घर के बक्से और तिजोरी क्या भरना।
जितनी ज़रूरत उतना कमाना पहले था।
अच्छी नीयत से ही चूल्हे जलते थे।
एक तीर से एक निशाना पहले था।
गैर की ड्योढ़ी पर अब बच्चे डरते हैं।
हर चौखट पर खेल खजाना पहले था।
दो दिन मेहमां ठहर जाये तो बोझ लगे।
मेहमां को भगवान बताना पहले था।
-विकास कालाआमी
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