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संगीत

                
                                                         
                            जो नदियां कलकल न करतीं तो जीवन में संगीत न होता
                                                                 
                            
पक्षी कलरव न करते तो ये गगन भी तो सूना होता
जीवन में यदि प्यार न होता मन भी नीरस रह जाता
सात सुरों का साज़ न होता मधुर गीत दिल न गाता

सोचो यदि ऐसा हो तो ये जीवन कैसा होगा
न मिलन की प्यास हृदय में न विरह का दुःख होगा

जो सूरज में तेज़ न होता चंदा फिर शरमाता क्यों
उड़ने को आकाश न होता पंक्षी पंख फैलाता क्यों
जो भोजन की आस न होती बोलो अन्न उगाता कौन
इस धरती पर जल न होता बोलो प्यास बुझाता कौन

सोचो यदि ऐसा हो तो ये जीवन कैसा होगा
न उमंग होगी जीवन में जीने का अहसास न होगा

जो गुलशन में फूल न होते खुशबू का अहसास न होता
फूल यदि सुन्दर न होते तो तितली का पदचाप न होता
पेड़ों पर पतझड़ न हो तो बहारों का इंतजार न होता
शाम ढले जो रात न होती नव प्रभात भी फिर न होता

सोचो यदि ऐसा होता तो ये जीवन कैसा होगा
न कुछ नया इस जहां में जीवन में बदलाव न होगा

सृष्टि के ये कुछ नियम अनौखे कुछ खेल निराले हैं
ईश्वर की रचना अलवेली इन्द्रधनुषी नजारे हैं
महसूस करो तुम हर लम्हे को ये बहुत महत्वपूर्ण हैं
प्रकृति का उपहार सभी को जो खुशियों से पूर्ण हैं।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

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