मिट्टी में लगाए गए पौधे ख़ुश थे
उन्हें पता नहीं था, एक दिन तोड़ा जाएगा उनके फूलों को
पौधे बड़े हुए
उनमें फूल लगे
फूलों को तोड़ा गया
तोड़े गए फूल नाराज़ थे
इसलिए नहीं कि उन्हें तोड़ा गया
इसलिए कि उन्हें नहीं सौंपा गया तुम्हारे हाथों में
फूलों को तोड़ा गया
मंदिरों में चढ़ाने के लिए
अर्थियों को सजाने के लिए
गंगा में बहाने के लिए
वे नाराज़ थे
उन्हें नहीं मिली जगह तुम्हारे क़िताबों के पन्नों के बीच दबकर सोने की ।
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