है मंज़िल ऊँची तो तुम सीढ़ियों को जोड़ के देखो
कभी इस नौकरी की बेड़ियों को तोड़ के देखो
जो इंसा ये बताए तेरे सपने दूर हैं तुझसे
वो बस एक मील का पत्थर है उसको तोड़ के देखो
अगर क़िस्मत कि रेखा कह रही है हार जाओगे
तो तुम बस जीत आओ और क़िस्मत मोड़ के देखो
बड़ी अच्छी है लगती नींद भी कम्बख्त बिस्तर में
उठो अब नींद से कम्बख्त बिस्तर छोड़ के देखो
तुम्हारा तन भी डोलेगा तुम्हारा मन भी डोलेगा
संभालो तन को और लड़की का चक्कर छोड़ के देखो
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