बंजर ज़मीं में पानी का निशान खोजते हैं,
लोग आदमी के अंदर इंसान खोजते हैं।
जब नए सिरे से बनाना होता है घर अपना,
ये शहर में कोई टूटा हुआ मकान खोजते हैं।
ऐ.सी. के दफ़्तरों में दम घुटता है इनका,
ये मयख़ाने में जाकर आराम खोजते हैं।
चंद पैसों में ख़ुद को बेच देने वाले,
घूस देके, अफ़सर में ईमान खोजते हैं।
परिंदों को पिंजरों में क़ैद करते हैं,
फिर प्रेमिका का भेजा पैग़ाम खोजते हैं।
बुरे हालातों में साथ छोड़ देने वाले,
बुरे हालातों में ही भगवान खोजते हैं।
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