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हमें मोहब्बत हो जाना है

                
                                                         
                            अजीब राब्ता है इस
                                                                 
                            
शमा बुझी महफ़िल से
मुक़द्दर भी हमको
ख़ामोश जुदा बना देता है

फिर ये कहें कि जिस दस्तूर
जहाँ पे जीते हैं
वही हमको महफूज़
जुदा बना देता है हमसे

दिल-लगी ना लगाना हमसे
उन ख़यालों की महफ़िल में
हमें भी लौट जाना है

फ़रियाद ना करना हमको
यूँ कहो कि इस
शमा बुझी महफ़िल से
हमें मोहब्बत हो जाना है
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2 दिन पहले

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