त्रस्त धरा के तारण हेतु
अर्द्धयामिनी में जनम लिए हैं,
जग को धर्म का बोध कराने,
कृष्ण मुरारी कसम लिए हैं।
दनुज–मनुज का भेद बताने,
धर्म–अधर्म का कर्म बताने,
कुंठित, वंचित शोषित–पोषित,
शंकित, दंभीत, अहम से प्रफुल्लित को
सत्व–तत्व का बोध कराने,
मधुसूदन अवतरण हुए हैं।
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